बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो
रजाई में दुबक कर वह स्वप्नलोक में पहुँच चुका है
नींद के आगोश में बेसुध पड़ा है उसे मत जगाओ
थक गया है जीवन संघर्ष से उसे मत पुकारो
हार गया है हर बाज़ी उसे विश्राम लेने दो
भारी मन से संसार को कह अलविदा
अपने वजूद को कुछ क्षण के लिए खोने दो
होश में रहने का दर्द उससे सहा नहीं जाता
नींद ही उसकी सच्ची हमदर्द दर्द से मुक्ति पाने दो
नींद को बना प्रेयसी आलिंगन करने दो
एक पल का सुकून पा लेने दो
बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो
जाग ने छीना उसका सपना सब अपना
नींद ने पुनः लौटा दिया जो स्वपन संसार ने अधूरा कर छोड़ा
आशा के रास्तों पर मस्ती से निकला था
निराशा के समुंद्र में उतार दिया सबने दिल तोड़ा उसका
सुप्त संसार जागृत संसार से कम डरवाना है
जीने की स्वतन्त्रा है सब कुछ इच्छित व स्वीकृत है
सामने दुश्मन से तो लड़ जाता है भिड़ जाता है
पर नींद के सामने हथियार डाल देता है
घुटने टेक देता है यँहा उसे हार मंजूर है
नींद से हार कर भी जीत का रूमानी सरूर है
बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो
एक नींद ही है जो उसे समझती है
एक नींद ही है जो उसे अपनाती है
एक नींद ही है जो उसे जिन्दा रखे है
एक नींद ही है जो उसे सच्चाई से जीना सिखाती है
इससे पहले की वह चिरनिद्रा में सो जाये
उसे निद्रासुख लेने दो
पहले वह नींद से आँख चुराता था
पर आज नींद ने उसे बेसाख़्ता कसकर पकड़ लिया
हर बार के बहाने को कर दरकिनार हावी हो गयी उसपर
कमजोर निर्बल सामर्थ्यहीन शरीर नींद से कैसे लड़ेगा
बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो
कर्म कर्तव्यों के बोझ तले दबा रहा वह सालों
आपदाओं विपदाओं ने कँहा सोने दिया उसे
उसकी वक़्त बेवक़्त की नींद चुभती थी सबको
जिम्मेवारियों की तीखी आवाज़े दबाती थी उसे
आज नहीं तो कल या फिर कभी नींद से करता झूठा वादा
अंतर्मन की चाह को कर अनदेखा नींद से दूरी बना कर रखता
जवानी में चकमा दे भाग जाता अब अधेड़ उम्र में गच्चा खा गया है
इस संसार की सबसे प्यारी चीज़ नींद
जो उसकी हमराज़ व हमसफ़र थी
उससे भी ढंग का रिश्ता न निभा सका था
बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो
दुनिया ने जब जब उसकी आवाज़ को दबाया डराया धमकाया
वह कई बार नींद में चीखा चिल्लाया बड़बड़ाया
जग की लगायी आग को सदा नींद के छींटो से बुझाता आया
अपनी मौजूदगी के सबुत देते देते थक गया है वो
एक साधारण सी जिंदगी जीने से भी कर दिया महरूम
घुट घुट कर घट घट कर शून्य तक उसे पहुँचाया
सम्पूर्ण जीवन जमापूँजी खर्च कर के भी व्यर्थता के अहसास से भर आया
कभी वक़्त की मार कभी लोगो के वार कभी हालत से शर्मसार
रोशनी के एक छोटे से पुँज के लिए खूब तरसाया
नींद के सहारे वह जीवन के लंबे सफ़र को तय कर पाया
बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो
एक नींद ही थी जो उसकी नाकामयाबियों में उसे सहलाती थी
आज नींद की एक आवाज़ पर वह खिंचा चला आया
बेवफ़ाई के रिश्ते में नींद की वफ़ा पर आँसू बहाने आया
जब वह नींद से टकराया
शरीर से जैसे आत्मा को बाहर निकाल लाया
बोझिल कदमों से नींद को स्वीकारा
नींद की मीठी लोरी सुनने आया
पुराने दोस्त की मुलाकात सी बेचैनी है
आज उसे किसी चीज़ की याद न दिलाओ
उसे नींद के समुंद्र में गोते लगाने दो
बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो
यह नींद ही उसकी हर बंधन से मुक्ति है
कच्ची नींद से जागकर सच्ची नींद की अनुभूति है
कर्मबंध जीवन से ऋणमुक्त होकर पक्की नींद लेने की युक्ति है
आज वह हर संसारी दायित्व छोड़ कर आया है
इस झूठी दुनिया में सच की परिभाषा गढ़ने आया है
आज जी भर कर नींद से वफ़ा करनी है
नींद ने भी उसे प्यार से धिक्कारा है
चैन की नींद किस्मत वालों को होती है नसीब
नींद की सच्चाई से वह एक बार फिर से हारा है
नींद के सहारे जिंदगी का शेष सफर जो गुजारना है
बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो