नारी तुम वास्तविकता में कँहा हो ?

नारी विडंबना देखो

नारी देवी है

नारी दासी है

नारी हर रोल में उपलब्ध है

पर नारी नारी रूप में नदारद है

कौन उस नारी को ढूंढे कौन उस नारी को खोजे

रूप बदलती प्रतिक्षण

गहरा है नारी अंतर्मन

सूखा है उसका प्रेमसुमन

बेचैनी रहती हरदम  

जन्मों की है प्यासी आत्मा

खोजती रहती परमात्मा

पूछने को है ढेरों प्रश्न

समझने में बुद्धि पड़ती कम

पल में तोला पल में माशा

रहस्यमयी नारी सारी की सारी

कभी दर्पण में जैसे साफ़ तस्वीर

कभी धुँधली आकृति की लकीर

नारी को तो समझ न सकी सारी सृष्टि

ब्रह्मांड में नारी या नारी में ब्रह्मांड

नारी शक्ति प्रचंड

नारी ही जीवन उद्धार

नारी में बसता संसार

नारी ही नर व संसार का संपूर्ण विस्तार

धन्य तुम होंगी जब नारी में पहचानेगा जग

सच्ची नारी का सार

सिर्फ एक बार नारी में छिपी नारी को

बाहर निकाल कर देखो उसका खुद का संसार

तब सब कह उठेंगे सच में

नारी सबसे न्यारी नारी सबसे न्यारी

नारी की प्रकृति

दुःखों की गठरी

दर्द का ज्वालामुखी

कष्ट को काटती कटार

कलेश का डंका

तक़लीफ़ में तुलती

असीम पीड़ा का बोझ

अवसाद का पत्थर

बीमारी में बेबस

गरीबी और भूख का बोझ

मौत से बेख़ौफ़

पीती अपमान का घूँट

उर्वरा तो जिंदा वरना जीवन बंजर जमीन

पुरुषप्रधान समाज की नारी

पिता की अनुमति

समाज की ज़िम्मेवारी

सर्वश्रेष्ठ दान कन्यादान

पुरुष का आधा अंग

हुकुम की तामील

आदमी का ऊँचा कंधा

परिवार की इज़्जत

घर की खामोश आवाज़

पराया धन है न याद

पुरुष से कम औकात

पुरुष से बराबरी गंदी बात

आँख नीची रख बेशर्म

लड़कों से रख दूरी

रात में निकलना न मिलेगी मंजूरी

कोख में असुरक्षित भ्रूण हत्या

सम्मान के लिए हत्या

प्रेम में न कहने पर हत्या

तेज़ाब का वार

देह व्यापार

मानव तस्करी का हिस्सा

छेड़छाड़ अपहरण यौन शोषण

घरेलू हिंसा व गाली गलौच

बस घर परिवार बाकी सब तेरे लिए बेकार

शादी अंतिम लक्ष्य

ज्यादा पढ़ कर क्या करना

नारी बनी सिर्फ निःस्वार्थ सेवा

स्व के लिए जीना भूल जा

दूसरी दुनिया नहीं बनेगी तुम्हारी

तू क्या जाने दुनियादारी बावरी

जितना जोर लगा ले अबला नारी

पुरुष से न कर पायेगी मुकाबला बेचारी

अद्भुत नारी

वक़्त की पहेली

उलझन की सहेली

काँच की प्रतिमा

दिखाती जादुई करिश्मा

हर बुराई का तोड़

जीवन का निचोड़

दुनिया का ज्ञानकोष

हर हालात में पा लेती संतोष

अनुभव की दुशाला

भविष्य पर रखती दृष्टिभाला

यादों का सहेजा अनमोल खज़ाना

सपनों का करती तैयार तानाबाना

मोम सी पिघलती सहानुभूति की साँच

भूख पहचानती रखती तैयार अन्न की आँच

चेहरे की गज़ब मुस्कान

कोहिनूर के हीरे से अरमान

अटपटी नारी

नाराजगी का मुखौटा पहने रहती

शिकायतों का पिटारा खोल देती

सोच में अचानक विपरीत चलती

जुबान से दुनिया का नज़ारा दिखाती

झूठ के आवरण बिछाती व ओढ़ती

दिखावे में सबको पीछे छोड़ती

नकली जीवन से स्वयं को सजाती

ख़ुशी में दबाकर जीवनविष पीती

दरिद्रता को झट से घर के कोने में दबाती

छदम भेष में रहकर स्व को नकारती

दुःख दिखाकर सुख को नज़र से बचाती

खुद को अबला मान लता सी सहारा ढूंढती

स्वास्थ में बेहद लापरवाह ईश्वर संभालेगा उसकी हर बात

चिंता की चक्की में पिसती दिन रात

नारी में घर

परिवार की है धुरी

बिन स्त्री दुनिया अधूरी

घर का है नज़रबट्टू

संसार रहता जिस पर लट्टू

रिश्तों की माला का है धागा

तुरपाई का तैयार सुई धागा

कुम्हार का है घूमता चक्का

चांदी का है गोल सिक्का

प्राणों में बसी है आत्मा

नारीशक्ति को प्रणाम करता परमात्मा

घर आँगन की है जोगन

घर सूना बिन स्त्री खनख़न

महिला दिवस :प्रकृति सी नारी

सदाबहार वृक्ष की है छाया

आँगन की है फुदकती चिड़िया

फूल की है कोमल पँखुड़ी

हंस की हंसनी सुंदर जोड़ी

धूप की है उजली किरण

आँगन में है तुलसी रोपण

पूर्णिमा का है रोशनमय चाँद

अलसुबह ओस की है नन्ही बूँद

इंद्रधनुष के सात रंग जैसे एकसार

बसंत ऋतु की महकती ठंडी बयार

हिम की चादर ओढ़े तपस्या में लीन

हरियाली के बिखेरती दूर दूर तक रंग

तीर्थों का है पुण्य स्थल

मोक्ष का है प्राप्ति फल

महिला दिवस :पंचतत्व का मिश्रण

ईश्वर की है अनुपम कृति

सबकी स्वीकृति पाना इसकी नियति

सहनशीलता में है धरती समान

हृदय विशालता में है आसमान

चलायमान है समीर समान

ऊर्जावान है धधकती अग्नि समान

नीर समान पवित्र इसके अश्रुमान

पंचतत्व का अद्भुत संतुलन नारी महान

काम क्रोध लोभ मोह अहंकार से ग्रसित

पंचभूत का संभालती प्रहार

महिला दिवस :स्वगुणी

नारी स्वयं में है परिपूर्ण

स्वाभिमान से है भरपूर

सदगुणों की है खान

जीवनसाथी के रूप में है वरदान

गुरू के रूप में दिखलाती मार्गदर्शन

मित्र समान करती मनोरंजन

मीरा समान है भक्ति

राधा सा करे प्रेम दिव्यशक्ति

कर्म को बना कर रखती मूलधन

घर हो या व्यवसाय कुशल प्रबंधन

कुशल मंगल की बड़ी ज़िम्मेवारी

दोनों कंधे मज़बूत देखो इसकी होशियारी

मानवता की है सच्ची दूत

प्रखर बुद्धि का है जिन्दा सबूत

योद्धा सी रहती सदैव तैयार

न्याय की लगाती जोरदार गुहार

एक पैर घर एक पैर बाहर

घर संसार की पालनहार

महिला दिवस :दैवीय शक्ति

सरस्वती रूप में विद्यमान अपार ज्ञान

लक्ष्मी रूप में वित्तकार्य से समाधान

अन्नपूर्णा पोषण करती दिव्य अनुष्ठान   

त्रिरूप में जागृत नारी शक्ति महान 

आस्था की है निर्मल मूर्ति

संस्कारो की सर्वोत्तम प्रस्तुति

ईश्वर की है साक्षात् उपस्थिति

माँ गंगा बन दे पाप से मुक्ति

सौभाग्य से चमकता जिसका मस्तक

लक्ष्मी के पाँव की मीठी दस्तक

ईश्वर की है मायावी शक्ति

जीवन मार्ग प्रशस्त करती ज्योति

पूजनीय है दुर्गा माँ का स्वरूप

अन्याय की ख़िलाफ है काली का रूप

महिला दिवस :ऐतिहासिक महत्व

औरत है कायदा सलीका

बेहतरीन जिंदगी जीने का तरीका

नारी सभ्यता में है पुरातन भारत

इतिहास की है बुलंद इमारत  

पीढ़ियों से सजाई है धरोहर

भारतीय संस्कृति का अनमोल जवाहर

ग्रंथ पुराणों में है स्त्री शाश्वत

पौरुष शक्ति का झेलती भार बिना झंझावात

युग परिवर्तन की जलती मशाल

भारतीय संस्कृति का गौरव चिरकाल

वक़्त की सुईओं की तेज़ रफ़्तार

हर सदी में दर्शन नव अवतार 

इंसानी ताक़त का करिश्मा

मरुस्थल में ठन्डे पानी का चश्मा

नींद का सच

बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो

रजाई में दुबक कर वह स्वप्नलोक में पहुँच चुका है 

नींद के आगोश में बेसुध पड़ा है उसे मत जगाओ  

थक गया है जीवन संघर्ष से उसे मत पुकारो

हार गया है हर बाज़ी उसे विश्राम लेने दो

भारी मन से संसार को कह अलविदा

अपने वजूद को कुछ क्षण के लिए खोने दो

होश में रहने का दर्द उससे सहा नहीं जाता

नींद ही उसकी सच्ची हमदर्द दर्द से मुक्ति पाने दो

नींद को बना प्रेयसी आलिंगन करने दो

एक पल का सुकून पा लेने दो

बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो

जाग ने छीना उसका सपना सब अपना

नींद ने पुनः लौटा दिया जो स्वपन संसार ने अधूरा कर छोड़ा

आशा के रास्तों पर मस्ती से निकला था

निराशा के समुंद्र में उतार दिया सबने दिल तोड़ा उसका   

सुप्त संसार जागृत संसार से कम डरवाना है

जीने की स्वतन्त्रा है सब कुछ इच्छित व स्वीकृत है

सामने दुश्मन से तो लड़ जाता है भिड़ जाता है

पर नींद के सामने हथियार डाल देता है

घुटने टेक देता है यँहा उसे हार मंजूर है

नींद से हार कर भी जीत का रूमानी सरूर है

बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो

एक नींद ही है जो उसे समझती है

एक नींद ही है जो उसे अपनाती है

एक नींद ही है जो उसे जिन्दा रखे है  

एक नींद ही है जो उसे सच्चाई से जीना सिखाती है

इससे पहले की वह चिरनिद्रा में सो जाये

उसे निद्रासुख लेने दो

पहले वह नींद से आँख चुराता था

पर आज नींद ने उसे बेसाख़्ता कसकर पकड़ लिया

हर बार के बहाने को कर दरकिनार हावी हो गयी उसपर

कमजोर निर्बल सामर्थ्यहीन शरीर नींद से कैसे लड़ेगा

बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो

कर्म कर्तव्यों के बोझ तले दबा रहा वह सालों

आपदाओं विपदाओं ने कँहा सोने दिया उसे

उसकी वक़्त बेवक़्त की नींद चुभती थी सबको

जिम्मेवारियों की तीखी आवाज़े दबाती थी उसे

आज नहीं तो कल या फिर कभी नींद से करता झूठा वादा

अंतर्मन की चाह को कर अनदेखा नींद से दूरी बना कर रखता

जवानी में चकमा दे भाग जाता अब अधेड़ उम्र में गच्चा खा गया है

इस संसार की सबसे प्यारी चीज़ नींद

जो उसकी हमराज़ व हमसफ़र थी

उससे भी ढंग का रिश्ता न निभा सका था

बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो

दुनिया ने जब जब उसकी आवाज़ को दबाया डराया धमकाया

वह कई बार नींद में चीखा चिल्लाया बड़बड़ाया

जग की लगायी आग को सदा नींद के छींटो से बुझाता आया

अपनी मौजूदगी के सबुत देते देते थक गया है वो

एक साधारण सी जिंदगी जीने से भी कर दिया महरूम  

घुट घुट कर घट घट कर शून्य तक उसे पहुँचाया

सम्पूर्ण जीवन जमापूँजी खर्च कर के भी व्यर्थता के अहसास से भर आया

कभी वक़्त की मार कभी लोगो के वार कभी हालत से शर्मसार

रोशनी के एक छोटे से पुँज के लिए खूब तरसाया

नींद के सहारे वह जीवन के लंबे सफ़र को तय कर पाया

बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो

एक नींद ही थी जो उसकी नाकामयाबियों में उसे सहलाती थी

आज नींद की एक आवाज़ पर वह खिंचा चला आया

बेवफ़ाई के रिश्ते में नींद की वफ़ा पर आँसू बहाने आया

जब वह नींद से टकराया

शरीर से जैसे आत्मा को बाहर निकाल लाया

बोझिल कदमों से नींद को स्वीकारा

नींद की मीठी लोरी सुनने आया

पुराने दोस्त की मुलाकात सी बेचैनी है

आज उसे किसी चीज़ की याद न दिलाओ

उसे नींद के समुंद्र में गोते लगाने दो

बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो

यह नींद ही उसकी हर बंधन से मुक्ति है

कच्ची नींद से जागकर सच्ची नींद की अनुभूति है

कर्मबंध जीवन से ऋणमुक्त होकर पक्की नींद लेने की युक्ति है

आज वह हर संसारी दायित्व छोड़ कर आया है

इस झूठी दुनिया में सच की परिभाषा गढ़ने आया है  

आज जी भर कर नींद से वफ़ा करनी है

नींद ने भी उसे प्यार से धिक्कारा है

चैन की नींद किस्मत वालों को होती है नसीब

नींद की सच्चाई से वह एक बार फिर से हारा है

नींद के सहारे जिंदगी का शेष सफर जो गुजारना है

बरसों बाद वह चैन की नींद सो रहा है उसे सोने दो

यह शहर

मासूम सा दिखता था कभी यह शहर

देखो कैसा शैतान की नज़र सा हो गया है

कल तक लगता था बड़ा अपना

आज अजनबी सा हो गया है

एक दौर था जब खुले दिल से करता था स्वागत  

लेकिन अब यह शहर बड़ा संगदिल हो गया है

पहले खुद में सबको समेट लेता था

अब खुद में सिमट कर रह गया है

इसकी हरियाली की दुनिया थी दीवानी

अब इमारतों का बियाबान जंगल सा हो गया है

कभी था खुला आसमान खुली जगह खुले रास्ते

आज आदमी के पंजे में जकड़ कर रह गया है

 खुले दिलवालों का कहलाता था यह शहर

आज अपनेपन दोस्ती पड़ोसी से रिक्त हो गया है

इसकी ताज़गी की दुनिया में थी मिसाल

अब अपनी ही बोझिल सांसो के तले दब कर रह गया है

चलता था कभी मस्त धीमी चाल

आज दौड़ती भागती जिंदगी की रफ़्तार बनकर रह गया है

कभी बेख़ौफ़ चलता था सड़क पर आदमी

सड़क का हाल देख आदमी सड़क से दूर हो गया है

वाहनों के काफ़िले चलते है दिनरात बेख़ौफ़

मज़बूरी में हर कोई भीड़ का हिस्सा बन कर रह गया है

मैं काफ़िर इस शहर में बेमक़सद घूमता हूँ

मंज़िल का पता नहीं देखो मैं तो रास्तो तक को भूल गया हूँ

शहर की आवारगी ने बौरा दिया है सबको

होश में आने से पहले होश गवाँने को मज़बूर हो गया है        

बड़ा सकून था बड़ा नाज़ था बड़ा गर्व था इस शहर पर

शहर की बदलती करवट से नज़र चुराने पर विवश हो गया है

रश्क करता था जिस शहर की ख़ूबसूरती पर

आज शक की निगाहों से देखने को मज़बूर हो गया है

घुटन बेबसी बदहाली ने इसकी रंगत बदल दी

इस बदरंग शहर को अपनाने के हौंसलो से पस्त हो गया है

हर सुबह अख़बार में शहर का हाल देखता हूँ

शहर की आबोहवा देखकर संभलना मुश्किल हो गया है

माचिस की डिबिया जैसे घर में कैद आदमी

आज सोच और दृष्टिकोण में कितना बौना हो कर रह गया है

शहर की बढ़ती आबादी ने कमजोर बना दिया इसे

सुख सुविधाओं से लैस शहर अब जीने में कम हो गया है

फीका पड़ चूका यह शहर ही है मेरी पहचान मेरे जीवन का हिस्सा

अपनी पहचान दुबारा पाने की कोशिश में शहर फिर से निकल गया है

महाशिवरात्रि पर्व

सृष्टि के स्वामी भोलेनाथ शिव

चले विवाह रचाने पार्वती संग

फाल्गुनी मास कृष्ण पक्ष तिथि चतुर्दशी

शिवरात्रि पर्व सब मनाते धूमधाम संग

त्रिलोकी कर संसार की रचना

चले घर संसार बसाने पुलकित मन

महाशिवरात्रि में निहित तीन महत्वपूर्ण प्रसंग

प्रथम सृष्टि की उत्पति हुई इस दिन

शिव प्रकट्य का भव्य दिन

ज्योतिर्लिंग के रूप में आगमन

द्वित्य शिवाशक्ति का विवाह दिन

तृत्य शिव का स्थिरता प्राप्ति का दिन

शिव ही पार्वती पार्वती ही शिव

विवाह रचा अर्धनारीश्वर हुए संपूर्ण

शिव है शक्ति पार्वती है भक्ति

हर जन्म में शिव को चाहा वर रूप में लागी प्रेमधुन

पार्वती ने सदैव शिव में पायो प्रेमरतन धन

हर नर में शिव हर नारी में शक्ति

आदर्श पतिपत्नी के रूप में जग करे सदैव वंदन

प्रेमऊर्जा की शक्ति से होते सभी संसारिक कर्म

अतः शिवपार्वती विवाह की होती ज़्यादा गुंजन

उल्लास से मनाते महाशिवरात्रि पर्व होकर हर्षमगन

शिव को मानो शिव को जानो शिवमय रखो जीवन

महाशिवरात्रि पर चढ़ाओ बड़ी श्रद्धाभाव से प्रेम के सुमन

न तुम न मैं सिर्फ हृदय में हो शिवप्रेम का सिंचन

सृष्टि ईश्वर मानव प्रेम में जब होंगे एकमय तभी मिलेंगे शिवदर्शन

सच्चा प्रेम

किसी ने पूछा

क्या है प्रेम की परिभाषा ?

जवाब मिला

बड़ी सरल है प्रेम की भाषा

प्रेम तो ईश्वर है

ईश्वर ही सच्चा प्रेम है

प्रेम सच्चाई है

सत्य ही ईश्वर है

प्रकृति साक्षात ईश्वर है

प्रकृति के कण कण में प्रेम है

प्रकृति प्रेम से लबालब है

प्रकृति प्रेम देती है लेती नहीं

जीवन सिर्फ और सिर्फ प्रेम है

प्रेम पर शुरू प्रेम पर ख़त्म जिंदगानी है

मनुष्य ईश्वर का अंश है

ईश्वर मनुष्य को करता प्रेम है

प्रकृति मनुष्य को करती प्रेम है

मनुष्य सब ओर से लेता प्रेम है

प्रेम में कंजूसी स्वार्थ है

जिस माटी में जन्म लिया

उस माटी में प्रेम है

जिस देश ने हमें प्राण व जीवनसुख दिया

उस देश से हमें प्रेम है

देश पर कुर्बानी प्रेम है

सबके साथ मिलजुल कर रहना प्रेम है

यह दुनिया प्रेमस्थली है

संसार प्रेम से बंधा है

प्रेम का आकर्षण हमें जोड़े है

आईने में दिखता है जो वह स्वप्रेम है

सेवा सत्कार सहचर्य प्रेम है

हर बुराई पर भारी प्रेम है

हर विष को पीता प्रेम है

प्रेम ऊर्जा संचरण है

परस्पर प्रेम सृष्टि का नियम है

कर्म प्रेम का मूल है

ज्ञान प्रेम का संचय है

भक्ति प्रेम की अभिव्यक्ति है

भाव प्रेम का रस है

दया प्रेम की उपज़ है

करुणा प्रेम में लिप्त है

प्रेम बिन शून्य जीवन है

प्रेम सबकी जरूरत है

प्रेम को बाँट दो बढ़ जायेगा

प्रेम को लुटा दो खुशियाँ फैलायेगा

प्रेमधन न खाली होता खज़ाना है

प्रेम की खेती सदा हरीभरी है

प्रेम के ईंधन से चलायमान दुनिया है

प्रेम से सब रिश्ते नाते है

आंख से बहते आँसू सच्चा प्रेम है

प्रेम सबसे बड़ा व सबसे ऊँचा है

प्रेम में डूब कर सब उबरते है

प्रेम बिना कला संगीत साहित्य सब सूने है

प्रेम की ध्वनि सर्वत्र है

प्रेम की जड़े गहरी है

प्रेम हर दिल की धड़कन है

सबसे प्रेम सच्ची साधना है

प्रेम ईश्वर आराधना है

ईश्वर गुरु संसार परिवार स्वयं

सब प्रेम की एक तार की माला है

हर समस्या का समाधान प्रेम है

प्रेम के बीज़ हर दिल में बोने है

प्रेम की फसल अमर है

अन्न से जीवन प्रकरण तक प्रेम है

प्रेम न सूख जाये रखना ध्यान

प्रेम की वर्षा से जीवन तृप्ति है

इतिहास गवाह है

जब जब ईश्वर व मानव का प्रेम हुआ भंग

मानवता और सृष्टि का हुआ अंत

सच्चा अच्छा निःस्वार्थ करो प्रेम

तभी तो जीवन होगा सफल व संपूर्ण

ईश्वर के दर्शन होंगे मंजूर

Happy Valentine’s Day

Love begins with red rose

Sweet gesture of love for sure

Only true lovers dare to propose

Will you be my Valentine, please assure ?

Chocolates allure taste of love, forevermore

Love is God’s gift, together we explore

Toast of love bonding, let’s celebrate and adore

Cuddle and care for you, my teddy bear, I endure

Waiting for right moment to propose, therefore

Let’s take our friendship, one step more

You are my Sweetheart, please don’t ignore

I‘ll keep my promise fair, seven and twenty four

Now give me warm hug, my comfort shore

A Gentle kiss on my forehead showcase, my love is secure

I got mine, you rush for your love pair score

Happy Valentine’s Day to lucky love birds, found rare and pure

चीनी

न चीनी लोग

न चीनी भाषा

न चीनी नूडल्स

न चीनी खिलौने

न चीनीमिट्टी बर्तन

न दाल चीनी

हम तो फिदा हुए ख़ालिस चीनी पर जानेबहार

बारीक़ सफ़ेद दानेदार चमचमाती चीनी शानदार

इसकी मिठास पर दिल हुआ निसार

प्रत्येक मिष्ठान में घोलती रस सदाबहार

हम तो खुश थे खाकर देसी गुड़ और शक्कर

पर चीनी ने बदल दी हमारी पुरानी जीवन शैली व सोच विचार

जब विदेश की विशुद्ध चीनी ने जीता भारतीय बाज़ार

देश के देसी गुड़ को झेलनी पड़ी करारी हार

चीनी के दाने नाकों पड़े चबाने मुस्कुरा कर हर बार

इससे आगे कौन पंगा ले मेरे यार

गुड़ सस्ता चीनी महँगी सहनी पड़ी जेब को भार

सरकार तक झुकती देख चीनी के भाव का चढ़ाव उतार

इसकी उपस्थिती के बिना पूजा पाठ सब बेकार

प्रभु दर्शन भी न मिलते सूखा व सूना संसार

मुँह में घुलती दिल में भरती ज़ायका मज़ेदार

पकवान की रानी जीभ को ललचाती आकर्षक उपहार

शादी ब्याह मुंडन गृह प्रवेश नौकरी की ख़ुशी के पल चार

मिठाई के आशीर्वाद बिन फीके लगते पर्व तीज त्यौहार

इसके आगे सभी घुटने टेकते फेंक हथियार

मीठे के इस एक रिश्ते ने रखे सब रिश्ते बरक़रार

इसकी चाशनी में डूब कर ही पाया जिंदगी का सच्चा प्यार

जुबान की कड़वाहट स्वभाव की अकड़ाहट पर उड़ेलती मीठा प्यार

अवसाद में सदा वापिस लायी खोयी जिंदगी के तार

दुःख दरिद्र कष्ट क्लेश दूर हुए सब मनोविकार

खुद सफ़ेद पर रंग भरती जिंदगी के बेशुमार

जब हुआ हमारा इससे साक्षात् साक्षात्कार

जीवन चलता चीनी शक्ति से है न अनोखा चमत्कार

चीनी में घोली जिंदगी या जिंदगी में घोली चीनी लाई सदैव बसंत बहार

चीनी धर्म निभाते निभाते कट गए जिंदगी के हसीन पल चार  

एक दिन चीनी की वफ़ा में छुपी बेवफाई से हम हुए दो चार

ज़ालिम हमारी सेहत का करने लगी नुकसान कर शांत वार

हमारे लाल ख़ून को सफ़ेद कर गयी बिन हथियार

हमारे शरीर में चीनी की परतों ने बढ़ा दी चर्बी की दीवार  

अब इसके मोह से कैसे छुटकारा पाये यार

डॉक्टर ने दी चेतावनी बन होशियार

चीनी तुम्हारी दुश्मन रखो दूरी नहीं तो झेलो प्रहार

चीनी से ले लो तलाक़ पर हस्ताक्षर

जल्द लगाओ नफरत की मोहर साकार

विदेशी आकर्षण में गुड़ शक्कर से भी धो बैठे हाथ इस बार

चीनी से जंग लड़ी न जाये सब योजना बेक़ार

यह चुपके से मुँह में आ घुलती कंही न होते दीदार

लिस्ट से रसोई से डिब्बे से किया इसे ग़ायब चीनीमुक्त संसार

चीनी की जगह कौन लेगा हुई बड़ी तक़रार

चीनी क्या गई हमारी जिंदगी साथ ले गई दिलजले की पुकार

कितने आये और चले गये चीनी सा स्वाद न दे सके सब बेक़ार

चीनी को अब करते है बस दूर से नमस्कार

चीनी को खाना तो दूर हाथ तक नहीं लगाते बस बंद चीनी प्यार

चीनी का मोह जीने नहीं देता घोर अत्याचार

चीनी का डर मरने से रोकता मायावी संसार

जीवन की कश्मकश से कोई तो निकालो बाहर

इसका विकल्प यदि आपके है पास तो जल्द बताओ मेरे सरकार

अग्रिमा

अम्बर से टुटा एक नन्हा तारा

जो था नभ का अद्भुत नजारा

कहलाया आकाश का दिव्य तारा

रोशनी में नहाया उज्जवल सितारा

उसके आगे फीका लगता ध्रुवतारा

आसमान के आँचल से उतरा प्यारा

धरती पर जन्म लेने को रूप धरा जारा

पृथ्वी पर प्रार्थना करते एक युगल ने पुकारा

हे प्रभु ! हमारी झोली में डालो आशीष तुम्हारा

ईश्वर ने झट दे दी मंजूरी लो संभालो आर्शीवाद हमारा

अब यही अद्भुत तारा बनेगा तुम्हारी आंख का तारा

वह प्रकाश पुंज माँ की कोख़ से जन्मा दोबारा

साल 2001 मास फरवरी तारीख़ 1 जन्मदिवस तुम्हारा

आलौकिक रूप से बहती थी उसमें प्रेम धारा

वह नन्हा सा फरिश्ता धरती के आकर्षण से हारा

दुनिया की नज़र टिकी थी वह था जो टिमटिमाता तारा

देखे उसे कँहा उतारा ईश्वर का दुलारा

हीरे सा चमचमाता हुआ उदित हुआ भोर का तारा

प्रभु की लीला देखो अनमोल रतन को साधारण से घर में उतारा

पाकर दिव्य वरदान हर्षाया परिवार सारा

नहीं थकते थे माँ बाप भाई करते प्रभु गुणगान बहुतेरा

सबने उड़ेल दिया उस पर ढेर सारा प्यार हाथो से उसे सँवारा

सुंदर आकर्षक हँसमुख दीवाना बना जग उसका सारा

बड़े प्यार से रखा स्कूल का नाम अग्रिमा पर घर में अरु कहकर पुकारा

अपने नाम अनुरूप सबसे आगे रहती अग्रिम तारा

जिसने स्वयं के नाम को जीवन में बखूबी उतारा

पढ़ाई खेलकूद नृत्य संगीत सैर सपाटा हर विधा को स्वीकारा

सब में रहती अव्वल पहनती सदैव टिआरा

शैतान की नानी खिलखिलाती सदा हमारी जँहाआरा

सबको हँसाती प्यार करती बहुत सारा

कभी देख बेइंसाफी बन जाती क्रोध का अंगारा

संतनी सा जीवन जीती बहुत कम चीज़ों में करती गुजारा

ज्ञान साधना में समय बिताती सारा

झूठ आडम्बर से रहो दूर देती सबको नारा

कंप्यूटर सा दिमाग झट से हर समस्या का निकालती समाधान चारा

दोस्तों की दोस्त दुश्मनों से शांत भाव से करती निपटारा

अपने काम से रखती काम देखता रह जाता संसार बेचारा

लक्ष्यप्राप्ति में अर्जुन समान लक्ष्य साध निशाना मारा

दम लगा दिया सारा कोई न छोड़ा किनारा

जीवन की प्रतिस्पर्धा में खुद के लिए समय कँहा विचारा

कर्म ज्ञान भक्ति का उदहारण बेमिसाल न्यारा  

स्वयं में संपूर्ण तुम अग्रिमा हमारी नयनतारा

स्वीकारो जन्मदिन की शुभकामनायें अद्भुत प्यार हमारा

ख़ुशी प्यार आशीर्वाद का संजो लो दिल में पिटारा

ईश्वर भी मुस्कुरा दिया जब उसने देखा दृश्य सारा

आसमान के तारे धरती पर उतर कर फैलाते उजियारा

सदा ख़ुश रहना हर दिल ने तुम्हें भेजा संदेसा प्यारा

बसंत पंचमी

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद

ऋतुओं की रानी तुम्हें हार्दिक अभिनंदन

माघ शुक्ल पंचमी मनाते सब हर्षमग्न

आज वसुंधरा ने ओढ़ा पीला वसन

प्रकृति पर चढ़ा भरपूर यौवन

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद

धरती पर उतरा साक्षात् भगवन

शक्ति प्राण चेतना का करो सिंचन

माँ सरस्वती आराधना का दिन

संगीत कला विद्या का आशीष वंदन

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद

प्रीत के पीत रंग में रंगे धरती और मन

प्रेम सदभावना और भक्ति का पीला रंग पहन

प्रेम ऊष्मा का नव संचरण आरम्भ

नए कार्य शुरू करने का शुभ दिन

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद

आज जी भर कर करे दोनों श्रृंगार

प्रकृति और मानव का अद्भुत मिलन

त्यौहार एक आशीर्वाद अनेक

हाथ जोड़ करे प्रकृति वंदन 

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद

विद्यार्थियों में विद्या उमंग

युवा दिखे प्रेम में सलंग्न

व्यस्क चाहे खुशहाल परिवार सुविधा संपन्न

बुजुर्ग करे प्रार्थना आरोग्य रहे तनमन

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद

प्रकृति का शुभ संदेश सुन

बसंत समान रहो आशावान    

जीवन में लाओ शुभ परिवर्तन

ऊर्जा हो मंद तो लौ जलाओ सदानंद

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद

कर्म से सवाँरो दुनिया का वातावरण

विद्या से बदलो स्वआचरण

कला बने अभिव्यक्ति का दर्पण

संगीत बिन सूना तन और मन

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद

पुष्प पल्लव लता वृक्ष समान

हरा भरा प्रफुल्लित रहे जीवन

प्रकृति को भाव वंदना श्रद्धा सुमन

प्रेम सदभावना का पवित्र बंधन

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद

झोली फैला कर लेना वरदान अनुपम

बसंत ने हरे सदैव जीवन के अपशकुन 

एकाकार होने से जुड़ेगा सृष्टि क्रम

आओ करे आत्मसात ईश्वर वचन

ऐ बसंत जीवन में भरती रहना आनंद