सावन की उलझन

रे सावन बता क्या है तू

क्यों बना मेरी उलझन तू

क्या सिर्फ ऋतुकाल का अंश है तू

या शिव की अद्भुत अनुकंपा है तू

क्या बिरहन की आँख से बहता आँसू है तू

या मन के भावों से रिसती जलधार है तू

क्या धरती की कोख में बीजने अंकुर आया है तू

या पापी दुनिया के पाप धोने उतरा है तू

क्या इंद्र का बरसता क्रोध है तू

या गंगा जल छिड़कता पुरोहित है तू

क्या धरती को करने श्रापमुक्त साक्षात् रूप में विचरता है तू

या काल का कहर बन बरस रहा है तू

क्या देवकलश से छलकता अमृत है तू

या दुःख संताप का उमड़ता सैलाब है तू

जब जब संसार का होता मंथन जीवसुधा सा लगता तेरा दर्शन

तेरे निर्मल रूप में विचित्र अनुभूति कितनी नदियों का संगम

हरियाला सावन तनमन भावन नवरूप में पृथ्वी का सृजन

काले बादलों के रथ पर सवार

बिजली की गर्जन से चमकती तेरी तलवार

धरती की काया बदलने आया नभ में चमत्कार

तेरे हाथों से हर जीव का जीर्णोद्धार

सूरज के ताप को करता निष्पाप

काल चक्र का बन वज्र ग्रीष्म से मुक्ति का देता वचन

भू को दिलाता पीड़ामुक्ति मानो सोमरस सेवन

पंच तत्वों का करने संतुलन धरती का सदैव करता आलिंगन

जल की धारा से निखरता प्रकृति में दिव्य प्रेम प्रतिक्षण

हरित वर्ण का शुभ वसन  पहन धरती का बढ़ता आकर्षण

तेरी दृष्टि में सृष्टि की उत्पति तेरा स्वागत हर घरद्वार वंदन

सावन चाहे तू बने पहेली या मन की उलझन

भीगे चाहे चोली दामन या भीगे कोमल मन

कारण कोई भी हो रे सावन पुलकित करता सदैव तेरा आगमन

भिन्न भिन्न रूप में तेरे अवतरण

दुःख से उबरु या सुख में डूबूँ

तेरे संग को तरसे धरती हर जीव हर प्राणी हर्षमग्न

क्योंकि रिश्ता तुझसे खासा अतरंग

योग का प्रयोग

योग

ईश्वरीय शक्ति

अनुपम भक्ति

आलौकिक अनुभूति

दिव्य वरदान

उच्चकोटि ज्ञान

सकल जीव उत्थान

कठिन साधना

श्रेष्ठ आराधना

प्रकृति प्रदत प्रेरणा

अपार ऊर्जा का संचार  

तन मन आत्मा का अलंकार

दैव्य शक्ति से साक्षात् साक्षात्कार

सूर्योदय से सूर्यास्त तक स्फूर्ति व आनंद का उत्साह

नव शक्ति नव प्राण नव चेतना का प्रवाह

योग प्रदान करे उत्तम उपहार

काया की कांति

आत्मिक शांति

समाप्त जीवन भ्राँति

नर से नारायण का लक्ष्य

योग साधे दुर्लभ मंतव्य

भोग और योग का संतुलित व्यय

पशु से बने परशुराम प्रत्येक जीव अभिलाषा

आत्मा की परमात्मा से आशा

केवल योग करे सफल आकांक्षा 

योग संभाले भौतिक युग के मनोरोगी

संसार का उपयोग करे कम रहे निरोगी

बनाये परिश्रमी संयमी और सहयोगी 

निःस्वार्थ कर्म

निर्मल ज्ञान

निश्छल भक्ति

योग का सरल दृष्टिकोण

धर्म अर्थ काम मोक्ष में हो संतुलन

योग के प्रयोग से हो नियंत्रण

स्व से स्वाधीनता की यात्रा

अनुशासित उत्साहित प्रफुल्लित सममात्रा

समर्पण भाव जीव को बनाता सुपात्रा

योग चिंतन

योग ध्यान

योग समाधान

विचार सकरात्मक

सोच रचनात्मक

कार्य कलात्मक

योग से योग्य पथ का विस्तार

दया क्षमा और प्रेम का सार

सफल हो जीव मुक्ति के खोले द्वार

आओ करे योग स्तुति क्योंकी

शरीर रथ

इन्द्रियाँ घोड़े

योग सारथी

सत्यगामी बन

सही दिशा में

मानव जीवन को मोड़

कर्म पथ पर तेजी से दौड़

यही है योग का निचोड़

मेरे देश की मिट्टी

मिट्टी पर पानी की सौंधी खुशबु

मिट्टी में लहलहाते खेत खलिहान

मिट्टी में हल और बैल चलाते किसान

मिट्टी की कोख में कुआँ और बांवड़ी

मिट्टी को छेदती टेढ़ी मेड़ी पगडंडिया

मिट्टी का रक्षक खड़ा सरहद देश का वीर जवान

मेरे देश की मिट्टी मेरी जन्म भूमि मेरा फक्र अभिमान

मैं मिट्टी का फ़ूल

मिट्टी से जुड़ अपनी पहचान बनाऊँ

धन्य मेरे देश की मिट्टी

तेरे प्रेम पर कुर्बान हो जाऊँ 

कच्ची मिट्टी के ढेरों मकान

रंगबिरंगी मिट्टी से सजा घर आँगन द्वार और रोशनदान

मिट्टी में उगी सब्जियाँ फ़ूल पत्तो से सजी क्यारियों की कतार

मिट्टी के खिलौने से खेलता नटखट बालकों का बचपन नादान

मिट्टी की गुल्लक में जोड़ते आने दो आने सिक्कों की मीठी खनक

मिट्टी की हांडी में पकता स्वादिष्ट साग और भांत भांत के व्यंजन

मिट्टी के मटके का ठंडा पानी या कुल्हड़ की गर्मागरम चाय का आनंद

मैं मिट्टी का फ़ूल

मिट्टी से जुड़ अपनी पहचान बनाऊँ

धन्य मेरे देश की मिट्टी

तेरे प्रेम पर कुर्बान हो जाऊँ 

मिट्टी में खेलते गिल्ली डंडा पिठू कंचे खोखो कबड्डी कुश्ती का दंगल

मिट्टी में सीखते परिश्रम साहस संयम के कठोर नियम

मिट्टी का चबूतरा बड़े बुजर्गों की हँसी मज़ाक बातों का अनवरत सिलसिला

मिट्टी सोखती आँसू गिलेशिकवे सुखदुख का निभाती गुप्त बंधन

मिट्टी का साँझा चूल्हा रिश्ते गर्माता रोटी का अपनापन

गाँव की मिट्टी में पलता जीवन प्रकृति का वरदान अनुपम

मिट्टी से उपजे खुशियाँ मिट्टी से निखरे सौंदर्य आयु और सेहत को मिले बल

मैं मिट्टी का फ़ूल

मिट्टी से जुड़ अपनी पहचान बनाऊँ

धन्य मेरे देश की मिट्टी

तेरे प्रेम पर कुर्बान हो जाऊँ 

मिट्टी से हुआ जब दूर निभाने दुनिया के दस्तूर मुठी में कैद की मिट्टी याद दिलाएगी मेरा वज़ूद

भीगी आँखों से छोड़ा मिट्टी तेरा साथ तुझ से मुँह मोड़ चला पीने दुनिया के कड़वे घूँट

सरहद का बुलावा मिट्टी का फर्ज़ सब छोड़ चल पड़ा चुकाने मिट्टी का कर्ज़

तुझसे बिछड़ के दुनिया घूमा पर तेरे आँचल सा सुख ढूंढ़ता रहा अकेला

आज बरसों बाद घर है वापसी वतन की मिट्टी को देखने अँखिया तरसी

सबसे पहले मिट्टी को शीश नवाऊँ मिट्टी का तिलक कर मिट्टी से फिर जुड़ जाऊँ

मिट्टी से कट कर सब कुछ पाया पर मिट्टी तेरा कर्ज़ कभी न चुका पाया

मैं मिट्टी का फ़ूल

मिट्टी से जुड़ अपनी पहचान बनाऊँ

धन्य मेरे देश की मिट्टी

तेरे प्रेम पर कुर्बान हो जाऊँ

मिट्टी ने देखे चारों युग और काल

बाढ़ भूकंप सूखा महामारी और युद्ध के घातक प्रहार

मिट्टी को बांटती सरहदें मिट्टी न रखती कभी कंही भेदभाव

मिट्टी में पनपी सभ्यता संस्कार रीत रिवाज़ तीज त्यौहार

मिट्टी ने सिखाया एक जरुरी पाठ हे मनुख अपनी जड़ो को न काट

मिट्टी से जुड़ने वालो की न होती कभी हार

मिट्टी ने संभाली मानवता मानव अब तू मिट्टी को संभाल  

मैं मिट्टी का फ़ूल

मिट्टी से जुड़ अपनी पहचान बनाऊँ

धन्य मेरे देश की मिट्टी

तेरे प्रेम पर कुर्बान हो जाऊँ

मिट्टी एक इसके रंग रूप हज़ार मिट्टी को मानो तो हो जाए ईश्वर के दीदार

मिट्टी की सौंगंध खाने वाले कहलाते मिट्टी के वफ़ादार गिनती के बस चार

मिट्टी के रंग की डाल वर्दी मिट्टी के फर्ज़ को निभाता देश का लाल

सरहद पर जवान खेत में किसान मिट्टी तेरे सपूत बेमिसाल

दिनरात देते पहरा मिट्टी का रंग रहे सुनहरा कभी न हो रक्त से लाल

ईश्वर गढ़ता मानव को मानव गढ़ता मिट्टी को मिट्टी के मोल जीवन पर अहंकार

मिट्टी में जन्मे पले बढ़े एक दिन मिट्टी में मिल जायेंगे जीवन का मूल मंत्र न बिसार

मैं मिट्टी का फ़ूल

मिट्टी से जुड़ अपनी पहचान बनाऊँ

धन्य मेरे देश की मिट्टी

तेरे प्रेम पर कुर्बान हो जाऊँ

रोटी

न दौलत से न शोहरत से

न मकान से न वाहन से

दुनिया का कारोबार चलता

माँ के हाथ से बनी रोटी से

जितना मर्जी कमा लो

जितना मर्जी घुमा लो

पेट की भूख मिटती सिर्फ

माँ के हाथ से बनी रोटी से

मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारे सब माथा टेकते

रब्बा तेरी रेहमत से रहे सलामत माँ की झोली

सुन रब ने बख़्शी बरकत और लियाकत

माँ के हाथों से बनी रोटी से

दुनिया की सारी ताक़त

बस एक इबादत के सामने घुटने टेकती

वसदा रहे मेरा घर परिवार

माँ के हाथों से बनी रोटी से

जन्मों जन्मों के नाते रोटी से भूख मिटाते

अपनों से गहरा नाता बनाती

बेगानों की कड़वाहटें पिघलती

माँ के हाथों से बनी रोटी से

नसीब हो इज़्ज़त की रोटी सब चाहते

जानवर को इंसान बनाती रोटी

ऊंच नीच भेद भाव सब मिटते

माँ के हाथों से बनी रोटी से

गोल गोल नर्म गर्म रंग सुनहरा

जब तक न घूमती प्यार के स्पर्श से

संसार का मर्म होता पूरा सिर्फ

माँ के हाथों से बनी रोटी से

घर व्यापार संसार सबको बांधता

सिर्फ अन्न नहीं यह तो है शक्ति का भंडार

रोटी का रिश्ता बनता परवरदिगार

माँ के हाथों से बनी रोटी से

रोटी के कर्ज़ उतारे न उतरे

रोटी की कीमत तब समझ आयी जब खुद बनायी

रोटी में सदैव ढूंढ़ता रहा प्यार की मिठास जैसी

माँ के हाथों से बनी रोटी से

समझौता

मैंने कम में जीना सीख लिया है

पैर पसार कर नहीं पैर सिकोड़ कर जीना सीख लिया है

एक दुआ दो रोटी तीन पहर की निगरानी

यही है मेरी जिंदगी यही है मेरी कहानी

जुबान की कड़वाहटें अब घुलने लगी है

शरीर की थकावटे अब कँहा खलने लगी है

काम क्रोध अहंकार ईर्ष्या लोभ जल कर राख हो गए

ऑंख का पानी अब सूख सा गया है

शिक़वे शिकायतें दिल की घुटन में दम तोड़ चुके है

न आने वालो का न जाने वालो का इंतज़ार रहता है

बस दिन भर एक बेचैनी एक उदासी का भाव रहता है

उम्मीद के तारे अब आसमाँ में नज़र नहीं आते

खुशनुमा माहौल के पदचाप सुनने को तरस गया हूँ

मिलने मिलाने के रस्मों रिवाज़ अब वादों में है इरादों में कँहा

हर निगाह है अजनबी हर विचार है चिरपरिचित देखासुना

रिश्तों की गंध में सुगंध पाने के कुछ प्रयास करता हूँ

वक़्त हाथों से रेत सा फिसल रहा है

उसके गुमराह होकर संभलने की राह देखता हूँ

पाँव चलते है दुरी है बस चार कदम

वही चेहरे है उन में खुद को पहचानने की कोशिश करता हूँ

बाहर की आबोहवा ने देखो कैसे सबकी रंगत बदल दी

आदमी मौन और सन्नाटा ऊँचे स्वर में चिल्ला रहा है

शरीर है मन है आत्मा कटकर कंही खो गयी है

आँखे कुछ तलाशती है पर हाथ सिर्फ कुछ धुँधली तस्वीरें है

घर सड़क पेड़ पौधे इंसान सब मिट्टी की परत में समा गए

झाड़ने से डरता हूँ कंही छिपा सच बाहर न आ जाये

अब जो जैसा है वैसा स्वीकार कर लेता हूँ

इंसानी फितरत को समझने में नहीं उलझता हूँ

जीवन का काल चक्र सब कुछ धीरे धीरे निगल रहा है

इंसान की बेबसी पर प्रकृति की हँसी सुन रहा हूँ

जीवन है पर जीने के मायने बदल गए

जीवन की मिठास में घुले विष को पीने के लिए मज़बूर हूँ

झूठ की जिंदगी अब सच के नीचे दबने लगी है

फीकी हँसी अब खुद को ही छलने लगी है

क्या खो गया है कुछ भी तो नहीं

सब कुछ वही है पर अपनों की तंगदिली अब बर्दाश्त होती नहीं

एक तूफ़ान कैसी तबाही मचा गया

साँसो में सदियों की वेदना छोड़ गया

सब्र के बांध अब टूटने लगे है

जितने पाँव जमाऊँ उतने उखड़ने लगे है

विश्वास करना चाहता हूँ पर सत्य की ठिठोली से डरता हूँ

दिनरात की अविरल यात्रा अनेक प्रश्नों के पड़ाव पर रूकती है

शरीर उत्तर से बेपरवाह दिनभर का सफ़र पूरा करता है

प्रेम अब वो पंछी है जो सिर्फ उड़ान भरता है नज़र आता नहीं

उसके लाख बुलाने पर भी मैं उस तक कँहा पहुँच पाता हूँ

मन के उदगार सुप्त है या विलुप्त है पता नहीं

ख़ामोशी लबों पर सदा की तरह सजी है

अहसासों के जंगल में आज मैं फिर अकेला हूँ

दो दिलों की दूरियों में न ख़त्म होने वाले फासले है

एक हाथ की दूरी है पर चुप्पी की दीवार कैसे लाँघे मज़बूरी है

मानवता का रक्त दिन ब दिन सूख रहा है

जीवन की नीरसता में एक बूँद अमृत की जरुरी है

रिश्तों के तार या तार तार रिश्ता

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

कहने को है अपने पर दिल में छेद कर जाते है

जीते जी संभलते नहीं पर मरने के बाद बहुत याद आते है

प्यार विश्वास व अपनेपन से बुने जाते है

लेकिन धीरे धीरे जी का जंजाल बन जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

रिश्तो की डोर बड़ी आकर्षक

ढीली या कसी जब गले पड़ी

ये रिश्ते बोझ बन जाते है

तन मन धन सब लुट जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

स्वार्थ की मिठास में लपेटे जाते है

ढोंग दिखावा व छलावा में तले जाते है

कभी हम भारी रिश्तों पर

कभी रिश्ते हम पर भारी हो जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

आँख की शर्म नज़ाकत व मान इज़्जत इसे बचाते है

बिना प्यार व संवेदना के पानी रिश्तों के पौधे सूख जाते है

आपसी समझ लगाव व श्रद्धा भाव हो तो पूजे जाते है

मतलब की गंध से तुरंत दूषित हो जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

कहने को है कभी मुँहबोले कभी धर्म और कभी ख़ून के रिश्ते

पर लाल से सफ़ेद होने में जरा भी देर नहीं लगाते है

रिश्तो का गणित बड़ा जटिल कौन उलझे

दरअसल रिश्ते तो बिना तोलमोल के निभाए जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

हो प्रेम त्याग समर्पण दोनों तरफ तो रिश्ते बखूबी निभ जाते है

हो एकतरफा तो बेवकूफ़ी का दर्जा पाते है

पाक साफ़ नीयत आदत व स्वभाव से रिश्ते रहते कायम

वर्ना कभीकभार ये तो बेकद्री में ही मारे जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

कुछ रिश्ते काम के कुछ रिश्ते नाम के

कुछ रिश्ते रूहानी कुछ रिश्ते बेमानी

कभी हँस कर कभी रोकर कभी लड़ कर कभी झगड़ कर

हर हाल में निभाये जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

माँ-बाप भाई-बहन पति-पत्नी बेटा-बेटी सास-ससुर

जेठ-जेठानी देवर-देवरानी चाचा-चाची मामा-मामी

रिश्तो की लंबी फ़ेहरिस्त कँहा तक संभालोगे

तौबा किया हमने इन रिश्तों से ये हँसाते कम ज्यादातर रुलाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

पहले होता था संयुक्त परिवार ख़ुशी बेशुमार

अब एकल परिवार में केवल प्राणी चार करते मूक व्यवहार

इन गूढ़ रिश्तों की है अज़ब कहानी

अपनी अपनी ढफली अपना अपना राग सुनाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

कुछ खट्टे कुछ मीठे कुछ कड़वे कुछ नमकीन

जायका बनाते बिगाड़ते जिंदगी का रिश्तों का स्वाद रसहीन

रिश्तो की डगर मुश्किल है सफर

बड़े बड़े लोग रिश्तों की डगर पर आसानी से लुढ़क जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

बिन रिश्तों के दुनिया कितनी अधूरी

हर रिश्ते में एक सोच और जज़्बात पाए जाते है

दिल के तार से बंधे तो बन जाये करतार

वर्ना दिल को तार तार कर जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

हर रिश्ता आशीर्वाद का प्रसाद नहीं होता

कुछ रिश्तों में शैतान के साये है

कुछ रिश्ते दिल से निभाये जाते है

कुछ बेबुनियाद निबटाये जाते है

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

ईश्वर से रिश्ता सच्चा सरल व सहज

पर उस पर भी पक्षपात व झूठा होने के आरोप लगाए जाते है

निःस्वार्थ भाव व निष्ठा अब किसी रिश्ते में कम ही पाये जाते है

रिश्तों की लाज सदैव अपने हाथ अन्यथा कहते रहोगे

ये रिश्ते बहुत दुःखाते है

मजदूर की पहचान

कौन है इस धरती का संरक्षक ?  

कौन है जिसके बिना व्यर्थ दुनिया के सब कामकाज ?

कौन दुनिया को बनाता जीने लायक स्थान ?

कौन कर्म को माने अराधना और पूजे इंसान मान भगवान ?

खुद रह निम्न समाज को देता उन्नति व सम्मान

श्रमिक कहलाता वह महामानव सेवक निष्ठावान    

यही तो है मजदूर की असली पहचान !

कम कपड़ों में बमुश्क़िल ढकी देह

तन दूषित होने की न चिंता न परवाह

पर मन को दुनिया की मैल से बचा

छोटे से छोटा काम करने को तैयार

हाथों में ले औजार एक मानव मौन महान

यही तो है मजदूर की असली पहचान !

मेहनत से छलकता पसीना योग्यता का प्रमाण

भोर से संध्या तक कार्यशील फिर भी निश्छल मुस्कान

बस रहती मन में एक धुन सवार

दिन के चौबीस घंटे में निबटा दूँ अड़तालीस काम

काम ही इसके प्राण बिन काम यह प्राणी निष्प्राण

धरतीपुत्र सदा करता धरती की सेवा इसे धर्म मान

यही तो है मजदूर की असली पहचान !

टूटे फूटे संसार की थोड़ी कर दूँ मरम्मत

असुंदर जग को बना दूँ सुंदरता की पहचान 

चलती रहे संसार की गाड़ी बिना व्यवधान

मजदूर खींचता संसार का पहिया अपना कर्तव्य मान

पत्थर की दुनिया में एक सच्चे इंसान की पहचान

यही तो है मजदूर की असली पहचान !

पहाड़ जैसे दिन का ठेला खींचे अपने दम पर

घर दुकानें ऑफिस मिल कारख़ाने और सरकार  

रहते इसके हाथों की रहमत से गुलज़ार 

दुनिया खींचने वाले की एक छोटी सी फरियाद

एक अदद काम और दो मुठ्ठी अनाज़

बिना मजदूर न चले इसके मालिक और सबके मालिक का काम

यही तो है मजदूर की असली पहचान !

भूख ही इसकी शक्ति जो इसे जगाती रुलाती दौड़ाती

सब खाते किस्मत की रोटी मेहनत की रोटी इसके नाम

तन तपा मन खपा पसीने से जलाता घर का चूल्हा

खुद से ज़्यादा परिवार को जिंदा रखने की कोशिश नाकाम

विशालकाय इस दुनिया में उसकी दुनिया सिर्फ एक तिनके के समान

मानवता का जिम्मा जिसके सिर का ताज गवाह इतिहास

यही तो है मजदूर की असली पहचान !

माया से सदैव दूर एक सूखी काया के निशान

जग रोशन करने वाला अंधकार तले गुजारता अपनी शाम

सिर उठा कर कब इसने देखा अपने हिस्से का आसमान

हक़ से ज्यादा न चाहा हदों में रहना सीखा

हाथों का कमाल दुनिया को बनाता बेमिसाल

झुक जाता इसके आगे भगवान पर नाशुक्रा केवल आदमजान

यही तो है मजदूर की असली पहचान !

कैसा नश्वर संसार

जीवन की क्षणभंगुरता  

हृदय विकल क्या दृष्टिपात

विराम कोलाहल शांति विराट

अंतर्मन में मचा अजीब सा हाहाकार

बुद्धि को मथते कुछ प्रश्न विचित्र

स्वाग्नि से निकले उत्तर अत्यंत कष्टप्रद

बेमानी सत्य कचोटता राग द्वेष का मौन प्रतिद्वंद  

स्वार्थ और परमार्थ में घोर असंतुलन निश्चय मानवीय हार

तन कौंधता मन रौंधता देख इंसानी खून के रंग हज़ार

दर्पण में उभरी अविश्वास की एक नई दरार

प्राणमुक्त भाव का कैसा संकुचित विचार

क्लांत मन निभाते सब औपचारिकता

कर्तव्यों का नपातुला संतुलित व्यवहार

चाहे अनचाहे टीसता रिश्तों में झलकता खालीपन

कालपथ पर दृश्यमान केवल स्वछाया के पद्चिन्ह

भ्र्मजाल में फँसे उद्देश्यहीन व्यथित तन और मन

तृष्णा पर वितृष्णा का प्रहार काल के भारी कदम

रंगबिरंगी रेशमी कृत्रिम बंधनों की गाँठे

स्वतः छीज कर कैसे हो गयी तार तार

छल कपट के कपाट सहसा हुए बंद

सरल व सुंदर जीवन के खुले प्रवेशद्वार

महत्वकांक्षा के पंछी जब हुए मुक्त

आनंद वन में पंछियों ने किया स्वछंद विहार

न्यून से शून्य होती प्रेम की रसधार

आशा की धूमिल डगर कैसे नापे बहकती चाल

जगत सदैव भारी पड़ता घर पर

घर की नींव कमज़ोर कैसे सहे भार

उलटफेर सब टेरमेर सिरमौर अब घरसत्ता की बिसात

टुकड़ो टुकड़ो में बँटी जिंदगी सिमटे कैसे संसार

सारगर्भित नवीन पथ पर मानव चिन्ह का अभाव

लक्ष्यप्राप्ति सिर्फ धन और मान कैसा पथभ्रमित इंसान

छिन्न भिन्न समाज के पुरातन रस्मो रिवाज़

दिशाहीन सोच पर कौन लगाए अंकुश बिन रीढ़हड्ड़ी समाज

रुग्ण मानवता वक़्त के हाथो आज लाचार

जीवन मृत्यु के बीच झूलते भय व पीड़ा के अवसाद

दंड झेलती संपूर्ण सभ्यता मानवीय गलतियों का परिणाम

स्वेच्छा से सब लेते देते पीड़ा से पीड़ा का कटु संवाद

व्यर्थता के मायने अब जाने बचा न धन और लाज  

गूढ़ सत्यों से परिभाषित मानवता सदियों का इतिहास

परम शक्ति का किया परिहास अहंकार बना मनुष्य का काल

निर्बल प्राणशक्ति दुर्बल इच्छाशक्ति से कैसा पथ विस्तार

वक़्त मिटा देता कायरों के नामोंनिशाँ

हाथों से छूट जाएगी एक दिन जीवन की डोर

नश्वर जीवन में अनश्वर सिर्फ होते कर्म विशाल

पग के बंधन जब चुभेंगे बन शूल

शिथिल साँस निस्तेज़ देह होंगे आहात बारबार

लघु जीवन का दीर्घ सच हृदय से कर स्वीकार

कर्म व ज्ञान की स्वआहुति मानवता के अग्नि कुंड में डाल

पराक्रम व परोपकार में निहित विजय पथ का सार

पल भर में समाप्त हो जायेगा जीवन

उस क्षण के लिए हँसकर हो जा तैयार

Blog Anniversary

~ Gratitude is like a little gift. And even more: it’s only a gift, not an obligation. I’ve received a lot of sweet words and support from you recently and I want to thank you from the bottom of my heart for it.

Hello friends,

On the occasion of first anniversary of my blog writing I would like to thank all of you for making this weblog journey lovable, enjoyable and remarkable. I want to share my blog experience and my blog journey during this one year with those friends who kept on guiding me and showing me the correct path for the improvement and betterment of my writings. Overall, It was a pleasant, wonderful and divine experience. I learnt a lot of new and exciting things once I stepped into blogger’s zone. I used this social platform for making a strong bond between me and my readers. This web-space extended not only my present readers but some new unknown faces joined too. When I started my blog I never had an idea of reaching this far. Some amazing and pretty good things happened on my blog. It became delightful experience because of the network of amazing people around me.

The celebration of my blog’s anniversary wouldn’t have been complete with all my viewers around me. Today as we speak, marks the one year of my blog writing i.e. 7th April,2020.It would not have been possible without your tremendous love and support. I really owe you so much for giving me your constant support, motivation, encouragement, and inspiration in this long journey.

Furthermore, let me tell you something about blog in short words for the new readers. Weblog is a free website for new writers to start their passion of writing to share among their friends circle. It is a digital diary that you share with the world. It is an online journal that is updated frequently. Aspiring writers can use this tool to polish their skills and showcase their thoughts, ideas and expressions worldwide. This media is readily available, widely spread and cost efficient platform to use.

To add more, this blog journey of mine started with my approach towards local newspapers and magazine publishers, who didn’t give me an opportunity to express my views in their esteemed publications. So, I resorted to this media and finally had a chance to share my voice via this digital media. The start was a bit underwhelming but eventually with each and every post, I had an insight on what the viewers needed to make this tool more viable. With every comment and criticism against my post, I got to know a lot about the areas which needed improvement in my writing skills. As I stand today, with this 100th post, my aim is to give my readers quality over quantity content.

After the completion of one year, I feel like I have improved over a lot of areas, even though the cycle of improvement never stops, I will continue to proceed in the right direction. Although, I am again giving credit to my viewers who made it through thick and thin and have been a constant critic over the past year. I am extremely grateful for your great presence on my blog page and blessings for my creative writing skills and for making this experience radical and phenomenal. Let’s move on this journey together as you and me can make things magical, meaningful and memorable.

~ Embrace your life journey with gratitude, so that how you travel your path is more important than reaching your ultimate destination. ~

Wishing health, happiness and good times ahead.

Love and regards

Manju Khosla

होमवर्क

कितना प्यारा, कितना मीठा, कितना जरूरी शब्द, होमवर्क

सुख से शुरू इसकी कहानी, बदलती जाती जीवन पर्यन्त

जब बचपन में मिलता था हम सबको स्कूल में होमवर्क

हंस खेलकर, कूद फाँदकर, नाचते गाते, मज़े से हो जाता था होमवर्क

मिलती थी कभी डाँट फटकार, कभी प्रशंसा व पुरस्कार

पर होमवर्क से सदैव रहता था बेहद लगाव व प्यार

स्कूल से शुरू हो होमवर्क पहुँचा घर, परिवार, ऑफिस, कारोबार

जवानी तक आते आते, यही होमवर्क बन जाता, सिरदर्दी व बुखार

बड़े क्या हुए, लटकी रहती सदैव, “जल्दी करो होमवर्क” की तलवार

होमवर्क का अर्थ बदल गया, अब जिम्मेवारियों कर्म कर्तव्यों का अंबार

सम्पूर्ण जीवन समाप्त हो जाता, पर होमवर्क खत्म न होता सरकार

बड़े प्रेम से सब एकदूसरे को सौंपते, व्यस्त रखने के असफल प्रयास

दूसरों को देने में सब उस्ताद, खुद रहते गायब, हाज़िरी बेकार

सीधे साधे, भोले, नादान कुछ बेचारे फँस जाते बिना काम

दिन ढल जाता, साल निकल जाता, पर खत्म न होता, होमवर्क का त्यौहार

कुछ जल्द समझ जाते, होमवर्क के दुष्परिणाम, दूर से करते प्रणाम

चुस्त, चालक, शातिर लोग होमवर्क करने का करते दिखावा, प्रपंच, ड्रामा हर बार

होमवर्क से वर्क, और वर्क से लेकर नर्क की यात्रा, कुछ न समझते, कुछ करते त्याग

ऑफिस जाते पति ने दिया होमवर्क, कहा घर का रखना ध्यान, भागवान

स्कूल कॉलेज जाते बच्चों ने बिना कहे थमाये अपने होमवर्क के प्लान

सास की आवाज़ आयी, बहू अक्ल क्या मायके छोड़ आयी ?

इतनी देर लगा दी, क्या होमवर्क करने का नहीं ज्ञान ?

कामवाली बाई आधा काम करके, आधा मेरे हिस्से में छोड़ गयी

बीबीजी बचा खुचा होमवर्क खुद कर लेना, तुम तो होमवर्क करने में मुझसे ज्यादा समझदार

मैंने बाई को थमाया उसका होमवर्क, वह मुझे वापस थमा, निकली मुझसे होशियार

समझ नहीं आता वो मेरी नौकर या मैं उसकी नौकर, होमवर्क का कैसा आदान प्रदान 

कौन मालकिन, कौन नौकर, कोई तो समझाए, इस पहेली का समाधान

होमवर्क करते करते जिंदगी बीत गयी, अब तो इससे मुक्ति दो भगवान

कोई तो इस होमवर्क के कुचक्र से बाहर निकालो, बचाओ मेरी जान

पिसते घिसते नर और नारी समझो उनकी व्यथा, होमवर्क देने की कुप्रथा 

होमवर्क देने वाले बहुत, पर होमवर्क करने वाले कम

होमवर्क करने वालो की कौन रखेगा लाज ?

जो गलती से सुन लेता, वो हो जाता इसका शिकार

जो होमवर्क पड़ा देख लेता, वो झाँसे में आ बन जाता गँवार 

जो रुक जाता, वो इसके जाल में मछली सा फँस जाता नार

बाहर रहने वाले होमवर्क से बच जाते, घर बैठने वाले की आती शामत, जाती जान

बातें बनाना, हंसी में उड़ाना, काम नहीं करना आता, खिसकना, सरकना, खेल आँख मिचौली

यह सब होमवर्क न करने वालो के बहाने, नखरे, जुबान से मुकर जाना आम बात

होमवर्क में जिंदगी या जिंदगी में होमवर्क पहेली नहीं दिखती इतनी आसान

यूँ तो जिंदगी में होमवर्क के सिवा रखा ही क्या है ? जनाब

पर होमवर्क का मचा के ज्यादा शोर और मचा के होहल्ला, कुछ लोग लगे रहते

खुद भी होमवर्क करने और करवाने, कर देते जीवन का मज़ा खराब

होमवर्क कैसा किया है ? किसने किया है ? किसने शरीर को है तोड़ा ?

यह तो कोई न बतलाता पर ख़राब होमवर्क पर जरूर डंडा लगाता

मेहनती, कार्यकुशल, समझदार लोग ही जानते होमवर्क कैसे निबटाना हँस कर यार

बाकी दुनिया राज करती होमवर्क न इन्हें देखना न करना गवारा

दुनिया तो न बदल सके पर सीख लिया आधा करना आधा आगे पहुँचाना

कुछ लोग दुसरो को खाली बैठा नहीं देख सकते अतः होमवर्क को नहीं भूलते दोहराना

गर सब करेंगे अपना अपना होमवर्क तो दुनिया बन जाएगी स्वर्ग का खज़ाना

किसी से यदि कराये होमवर्क, न भूले, उसका काम, सम्मान, मेहनताना

होमवर्क का गर करे मान, तभी मानव का मानव संग होगा, सच्चा दोस्ताना

मानवता

वक़्त का देखो चमत्कार

आज ब्राह्मण और शूद्र दोनों एक नाव पर सवार

सबसे उच्च जाति ब्राह्मण सबसे नीच जाति शूद्र हुए एकसार

मानव संस्था के कुल चार वर्ण व प्रकार

क्षत्रिय और वैश्य भी बाज़ार की मंदी से जूझते लगते बेरोज़गार

वक़्त की पड़ी ऐसी मार भेदभाव व नफरत की गिरा दी दीवार

सब करेंगे अपना अपना काम शूद्र का हो जायेगा उद्धार

जाति नहीं जन्म नहीं कर्म हो सबका जीवन आधार

सब धर्म जाति कुल घराना वक़्त की ढाल से बने निराधार

दुनिया पर राज करने वाले देखो आज वक़्त के हाथों लाचार

शुद्धता पवित्रता सात्विकता मानवता की धरोहर

कब तक ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य समेटेंगे अपने विहार

मानव में मानवता देखो नहीं रंग रूप अमीर गरीब की दीवार

विपत्ति में ही समझ आवे ज्ञान की बात पर नासमझ संसार

बहुत ली सेवा अब लेने दो उन्हें मेवा कुछ तो समझो मानवाधिकार

सेवा के बदले सेवा सम्मान के बदले सम्मान यही सबसे सुंदर उपहार

ब्राह्मण मिटावे शूद्र भाव विद्वता संग सेवा भाव का संचार

शूद्र बन विद्वान मिटा दे मलीनता कलुषता भरे आचार विचार

ज्ञान और कर्म के घाट पर सब मनुख एक समान वक़्त की दरकार

बुराई अंधकार अज्ञानता का होगा सर्वनाश जब एक साथ करेंगे प्रतिहार

चारो वर्ण हो जायेंगे सुवर्ण गर प्रेम एकता ज्ञान कौशल का लेवे संस्कार

मानवता का सिर होगा गर्व से ऊँचा जब धरती पर होगा रामराज का विस्तार

गुजरे ज़माने की पीड़ा को मलहम लगा दो करो प्रेम और समर्पण से सत्कार

सब धर्मो से बड़ा मानव धर्म कह उठेगा संसार नव चेतना से जीर्णोद्धार

आईना

वक़्त ने अचानक मुझे आईना पकड़ा दिया

स्वयं की बदली तस्वीर को आईना ने एकदम साफ दिखा दिया

मुझे मेरे बीते कल से सहज ही मिलवा दिया

आज वक़्त ने बेदर्दी से सब बेमानी पर्दों को उठा दिया

जीवन की वास्तविकता से गहरा परिचय करा दिया

संसारिक बंधनों के खुदगर्ज़ धागे यकायक बिखर गए

मेरे और चिरसत्ता के बीच मौन के स्वर स्वतः उजागर हो गए

एक अंजान अदृश्य ताक़तवर दीवार के टुकड़े टुकड़े हो गए

मेरे और जीवसत्ता के बीच खींची थी एक प्रबल शक्ति की सीमा रेखा

संसार रूपी विरोधी ऊर्जा जिसके पार न दिखता तेरा सुंदर झरोखा

सब भाव-बंधन कर्म-कर्तव्य बंद मुठ्ठी में रेत समान हुए गुम

रंगीन दुनिया मानो ग़ायब हो गयी रह गए सिर्फ मैं और तुम

अत्यंत स्पष्ट हो गया वजूद मेरा और तेरा विस्मित हूँ देख ऐसा सवेरा

यह दुर्लभ साक्षात्कार कदाचित खुले नेत्र से देखता स्वपन सुनहरा

कैसे सब भ्रम जाल तोड़कर तू सामने स्वयं उपस्थित हो गया

धरती की सत्ता का साक्षात् सबूत मिला मैं तो नतमस्तक हो गया

खुद के प्रतिबिम्ब को देखकर स्तब्ध हूँ

अपनी खोयी पहचान पाकर निःशब्द हूँ

कैसे सदियों की दौड़ को दे दिया आंशिक पूर्ण विराम

तेरा निष्पक्ष इंसाफ देख मैं निरुत्तर हूँ

खुद को आईने में देखकर शर्मिंदा हूँ

सबकुछ गवाँकर व लुटाकर आज भी मैं जिंदा हूँ

बेहोशी को तोड़ तूने होश तो मुझे थमा दिये

पर होश की हवा में मानो आज भी खोया हुआ परिंदा हूँ

सृष्टि का चक्र उल्ट गया चलायमान संसार रूक गया

मैं ही मैं और तू ही तू सत्य को पहचानना बेहद बुश्किल काम

माया के सब दर्पण टूटे जीवन अब रिक्त खेल का मैदान

मेरी नज़र तुझ पर और तेरी नज़र मुझ पर

अब कहने सुनने को क्या रह गया मेहरबान 

सूखी बंजर ज़मीन पर खड़ा मैं निष्प्राण

धन की मृगतृष्णा से विमुक्त मेरे जीवन व प्राण

मेरी जीवन खोज तू ही तो था प्रदाता सुखदाता

तेरे मेरे बीच प्रेम का सेतु आज स्वयं बना विधाता

इससे पहले यह दुनिया फिर से पहरेदार बैठा दे

तेरे मेरे बीच की दूरी फिर से बढ़ा दे

मेरा आईना छीनकर फिर से मुझे रुला दे

एक बार बस एक बार फिर से अपना हाथ बढ़ा दे

तुझ तक जाते जीवन पथ का मार्ग सुगम करा दे

कमज़ोर बंधनों में बंधने से पहले मिला एक सच्चे प्रेमबंधन का निमंत्रण

संसार सबसे बड़ी मिथ्या आईना ने दिखाया जीवन का श्रेष्ठ मूल मंत्र

मोह के इंद्रजाल ने जी भर के सताया छल कपट अहंकार से सजा रंगमंच

कुशक्तियाँ का षड़यंत्र जग में फैलाने को तैयार फिर से एक नया प्रपंच

तोड़ देगी दुनिया मेरा आईना जीत जायेगा यह संसार

फिर से सिर उठा लेगा शेषनाग का फन डसने को तैयार

तुझसे बिछुड़ने का समय अब आ रहा अपनी अपनी दुनिया से होंगे चुपचाप दीदार

बस कुछ क्षण के इंतजार के बाद माया का फिर से होने वाला है अवतार

Cry for Corona

Eruption of pandemic Corona Virus

An awful, serious and deadly illness

Broke the vicious cycle of man‘s ruthlessness

No more human craziness

Life on the Earth is precious

How easily man is vulnerable to sickness

Corona uprooted the tree of humans

Every soul sounds breathless

Darkness, danger and death visible as threats

Put the man in cage merciless

World in chaos everyone cry for Corona

An evil’s reign prevails how sinfulness

God’s blessing eloped suddenly

Powerful man punished for his wickedness

No cure no medicine no treatment

Corona attacks silently world clueless

Humanity again under question

No one has answer for Corona man speechless

Corona spreads across the world

Like Jungle‘s fire endless

Pay the price of insensitivity

Nature’s curse on man’s carelessness

Body clock is disturbed in fear of Corona

no effort brought comfort people hopeless

Man’s monopoly on the Earth

Today seems meaningless

It‘s time to repent for imbalance

To acknowledge God’s graciousness

Corona has appeared as a tool

To awake the world’s lost consciousness

Nature, Earth and Mother teach together

Don’t take granted our kindness

Life is a journey and man is on the wheel

On the road of humanity you can’t drive reckless

Off the track even God can’t save you dear

Corona’s threat to human act preserve equalness

Fair promise to mankind ensure Corona-free universe

Globe will glow again with man’s spirit and sweetness

Astrological reasons for Corona Virus

  • The study of effects of nine planets on human body is called astrology.
  • Astrology, being divine science, answers all questions related to man and mundane.
  • Seven planets (Sun, Moon, Mercury, Venus, Mars, Jupiter, Saturn) are physically present in the universe and visible too while two planets (Rahu and Ketu) are mere shadows, don’t exist physically so not visible. But their presence is very powerful and has great capacity to cease the power of other planets. Rahu and Ketu are considered as planets even if they remain invisible.
  • Tides in sea during full moon, Solar eclipse and Lunar eclipse are some of the examples to understand the planet’s effect on man and nature.
  • Our life is greatly influenced by four major planets mainly ; Saturn, Jupiter, Rahu and Ketu. Saturn (2and1/2 yr), Jupiter (13 months), Rahu (18months) and Ketu (18 months). These planets stay for longer time in transit in any zodiac sign.
  • Saturn is a planet of misery and Jupiter is a planet of blessing. Both balance and compliment each other and are necessary for any major event to happen.
  • Today the whole world is facing the biggest threat to human life, the deadly corona virus disease called Covid-19 which is incurable and is declared pandemic.
  • Let’s see how astrology helps in understanding this concept. Which planet is responsible for this pandemic? How planets play their role to cause boon or bane?
  • Rahu and Ketu are Karmic Controlling Planets (KCP). Rahu and Ketu serves opposite good and bad, lots and nothing, give and take. Rahu is highest financial achievements and Ketu is highest spiritual pinnacle. Rahu means (bhoga) and Ketu means (moksha).
  • Rahu and Ketu are always 180 degree apart and are in 1/7 position facing each other in kaalpurush kundali. This position is called Ra/Ke axis. Any planet comes under Ra/Ke axis loses its power.
  • Time is a big healer and nature works as a divine force in keeping the world worth-living and sustainable.

Here is a kundali of kaalpurush which will give you the rough idea of how 12 zodiac signs,12 houses and 9 planets combine together to give you answer of your questions.

Transit 2020 Kaalpurush Kundali

Let’s understand the eruption of corona virus by knowing important houses, planets and signs.

6th house in Kaal purush Kundali:

Diseases, enemies, loans, struggles, hurdles, fighting spirit, injury, illness, job, servant, pet animal (6,8,12 houses are bad and secret houses).

Rahu‘s characteristics : Dragon’s head, outer world, materialism, mischief, represents foreign land, foreign travel, changeability, sudden results, fear of unknown, obsession, confusion, darkness, dirty places, misconception, superstition, wickedness, mean, causes epidemics, diseases difficult to diagnose, research, medical planet, poison, medicine, antibiotics or drugs, computers, intuitive power, smoke, things that are not clear and correct, heights and upliftment.

Ketu’s characteristics : Dragon’s tail, spiritualism, Moksha, cuts, wounds and spots on body, occultism, detachment, diplomatic, dissatisfaction, imprisonment, unknown disease, undiagnosed disease, inner knowledge, insights, inner world, liberation, spiritual persuasion, scriptures knowledge.

Let’s understand the phenomenon of Rahu and Ketu on our life by the following diagram. How do we do our life’s journey is controlled by Rahu through materialism and by Ketu through spiritualism reaching at same ground. If your Rahu is powerful you will rise high and prosper and if your Ketu is strong your inner self will grow more than your outer self by detaching you from money and power. Thus leading you to spiritualism. Your journey towards God is same in both the cases whatever path you follow.

Saturn’s characteristics : Planet of contraction, discipline, isolation, service, kind of job, servant, profession, daily chores, master of karma and justice, low grade or labour jobs, begger, old age, longevity, elder’s grace, travels, ailments, helplessness, poverty, disgrace, death, sacrifice, controller of human actions, punishment or reward of your gesture, action and contribution towards humanity, selfless service, life trainer, life experiences, hard task master, true judge and controls the whole world by direct or indirect actions, long illness, body pains.

Jupiter’s characteristics: Planet of expansion, happiness and growth, Divine grace, deity, spiritual guru, teacher, priest, adviser, counsellor, money, education, knowledge and wisdom, physician, medicine, treatment, all sort of help, fortune, well being, prosperity, saviour.

Cause of corona:

Rahu is in Gemini sign (neck,throat,hands,breathing) which is sign of mercury and it is airy sign (breath of person). lungs, kidney and blood are airy in nature and here in kaalpurush kundali Rahu is in exaltation state (elation and elevation state) and in its own nakshatra Ardra making it more powerful. Ardra nakshtra is ruled by Lord Shiva who has power of destruction. Rahu ‘s power is enhanced too much to release negativity in the form of poison like uncurable disease Corona. So when Rahu will come under Mrigshira(Mars) nakshatra, things will get better.

Rahu is also affecting 6th sign which is again mercury sign and in kaalpurush kundali it is a disease house so both the signs Gemini and Virgo are under Rahu’s influence. Being in exaltation state it not only increases its material power through human‘s efforts in 3rd house i.e. (shoulders and responsibility), communication, trade, money, intellect, education, learning, skill. It also controls and balances the karmic connection of humans and earth too. In 3rd and 6th sign Rahu and Ketu give prosperity but give illness too.

Also, Rahu is positioned in Gemini Sign whose lordship is governed by Mercury which is going to be in debilitated state (powerless state) till it acquires its own sign Gemini at the end of May.

Here Rahu used illness as poison to kill poison (negativity) of the filthy world. Rahu spreads chaos and superstition, events happen suddenly, illness or threats from foreign land, undiagnosed and uncurable disease for man and bad effects on mundane affairs. Here the killer will be healer too as positive Rahu gives the cure and treatment of the disease too. So the whole process is negative eradicates negative.

According to numerology, this year is governed by Rahu too(2020=2+0+2+0=4 which is Rahu’s no.). so Rahu is very powerful in nature to release positive traits like internet’s role in communication and trade which are mercury’s traits plus negative traits like deadly disease Corona Virus.

Ketu here is in Saggitarius sign with Jupiter forming Grahan Yoga (making Jupiter weak by taking its power). Ketu gives confinement, knowledge, protection, sacrifice, dissatisfaction and unknown fears as it is with Jupiter, the divine healer and the protector.Ketu has become more powerful due to Jupiter. Being on Ra/Ke axis and neechabhilashi (towards debilitated sign) Jupiter is incapable to show its grace.

Moreover, in mid of May , Jupiter will be in Retro state , which may lead to prolong behaviour of disease. During Jupiter’s retrogradation from Capricorn (debilitation sign) to Saggitarius (own sign),people will seek more knowledge, more actions towards humanity and charity,more humble efforts to find out its cause and cure, more prayers, more spiritualistic atmosphere will prevail worldwide.

World will be on one platform to tackle this deadly disease and towards its trearment and cure to bring back the world to normalcy. September onwards the world will be on healthier and disease free path.  

Relief from Corona Virus :

Jupiter is in Saggitarius sign which is its own house and its mula trikona rashi. Here Jupiter becomes more powerful because it is at trikonasthana, fortune house, has aspect on ascendant (lagan), 3rd house Rahu and 5th house knowledge,education and good morals . Out of Jupiter and Rahu whosoever will become strong will control the other. Once Jupiter becomes strong it will take care of its significations. We need Rahu to become weak and Jupiter to become strong to control the situation.

Jupiter will remain in Saggitarius from 5 Nov. 2019 – 20 Nov. 2020 and during this time it will move to capricorn sign and will be retrograde state too. Jupiter,the saviour, has to be strong to yield positive results.

S No.Date ( for year 2020 )Position of PlanetRelief(positive movement)
127th MarchMars in CapricornFirst
228th MarchVenus in TaurusSecond
329th MarchJupiter in CapricornThird
413th AprilSun in AriesFourth
520th MayRahu in Mrigshira Nak.(Mars)Fifth
624th MayMercury in GeminiSixth
714th MayJupiter (R) in Capricorn Status quo
830th JuneJupiter (R) in Saggitarius Status quo
913th September – 20th NovemberJupiter direct in Saggitarius disease free world

Remedies for Corona Virus :

  1. Make your Jupiter strong by following holistic life style.
  2. Compassion, passion, devotion are essential to lead happy and peaceful life.
  3. Follow less materialistic more spiritualistic approach.
  4. Do regular charity, donation or help without a word.
  5. Disciplined life and selfless services required.  
  6. Self, family, world and God, make balance between all four.
  7. Healthy life style with positive mind will heal you and others too.
  8. Cleanliness, piousness and righteous behaviour is mandatory to save you and the world.

Let’s pray to God together for speedy recovery of the people and the Mother Earth.

Stay happy and blessed all of you.Let the world heal,feel the zeal and move its wheel once again.

Thanks and regards for reading patiently and kindly.

कोरोना वायरस ज्ञान का अमृतरस

भयंकर बीमारी का रूप धर

दैत्य सा आ खड़ा हुआ वायरस कोरोना

दुनिया में मच गया हड़कंप

चिल्लाये सब हाय कोरोना हाय कोरोना

दौड़ती उड़ती दुनिया धड़ाम से हुई बंद

घर में हुए सब कैद बाहर बैठा पहरेदार कोरोना

क्या है जीवन का सच्चा ज्ञान और रस

खूब समझ में आया जब भयभीत किया कोरोना

वक़्त तुमसे कुछ कह रहा है तुम सुनो ना

अपनी बेतरतीब जिंदगी को थोड़ा संभालो ना

हवा में उड़ते फिरते हो जमीं पर पाँव रखो ना

काम के बहाने भागने वालों घर की थोड़ी सुध लो ना

तुम्हारे पैर घर में नहीं टिकते घर में थोड़ा पैर पसार के बैठो ना

बाहर की दुनिया के पंछी घर के बंदी बन कर रहने का सुख भोगो ना

आकाश की बुलंदियाँ छूने वालों धरती के फर्ज़ कभी भूलो ना

स्वयं से रहते बेपरवाह आज आईने में खुद को सँवारो ना

प्यार के मीठे दो बोल कह कर कानों में रस घोलो ना

दूर रहे जीवन भर कुछ क्षण फुर्सत के हमारे साथ बिताओ ना

बेचैन रहते हो दिनभर कभी तो चैन की बंसी बजाओ ना

अपने स्वास्थ के लिए योगा ध्यान व व्यायाम में समय लगाओ ना

वक़्त मिला है आज पूजा के लिए बड़े प्रेम व श्रद्धा से प्रभु को ध्यायों ना

घर को स्वच्छ बनाने में हमारे साथ जुट जाओ ना

अख़बार किताबें धार्मिक ग्रंथ अब तो दृष्टि में लाओं ना

सूखे बेज़ान पड़े रिश्तों में प्रेम की खाद और पानी की बौछार बरसाओ ना

चलते फिरते खाना खाते हो आज खाने को स्वाद लेकर खाओ ना

परिवार संग बैठ खेलो गेम्स कुछ हँसी मज़ाक गपशप दिल के तार जोड़ो ना

भय बिन प्रीत न होवे कोरोना के भय से तुरंत समझ आयो ना

बाहर का तूफान जब घर की शांति से टकरायो ना

उड़ जायेंगे सब घर के पंछी जब ख़त्म होगा बीमारी का वायरस कोरोना 

जीवन सन्देश छोड़ जायेगा दुबारा न आना पड़े समझे प्रेम से जीवन जीना

कोरोना वायरस दुनिया बेबस

दुनिया के गोल गोल घूमते पहिये में लगा वायरस का जंग

जो दुनिया क्षण भर के लिए भी न रूकती एक क्षण में बन गयी हिमखंड

जब फैला भयंकर बीमारी कोरोना वायरस का दंश  

संसार का चक्का बिगड़ा शैतानी शक्ति के भय से सब ओर लगा प्रतिबंध

मानव व प्रकृति सब महामारी कोरोना वायरस के मकड़जाल में नज़रबंद

पृथ्वी का काल चक्र घूमता घूमता हो गया मंद

थम गया परिवार संसार कारोबार सब भागे घर अंधाधुंध

जन जीवन हुआ अस्त व्यस्त फैल गयी कोरोना वायरस की दुर्गंध

मानव को चलनी पड़ी उलटी चाल काम काज हुए सब ठप्प बंद

चौपट हुआ आहार विहार आवागमन सब कार्यक्रम हुए ठंडे बस्ते में बंद

होश उड़ गए सारी दुनिया के देख ईश्वर का प्रकोप व दंड

बीमारी के एक कीटाणु ने हिला कर रख दिया पूरी सदी का कालखंड

सदियों से खड़ा मजबूत संसार आज दिखता कमज़ोर अपूर्ण मानवता स्तम्भ 

ईश्वर के मार्ग को छोड़ कुमार्गी हुआ मानव बदले इसके रंग ढंग

मानवीय मूल्यों को दे तिलांजलि मनुष्य ने किया घोर पाखंड

स्वार्थ की दुनिया में सब कुछ मिटा दिया चकनाचूर हुआ मानव दम्भ

पतन के गर्त में पहुँचा दिया संसार देख मानव के अमानवीय प्रपंच

अपने बुने मायाजाल में कैद होकर रह गया मानव बना भंड

दूषित वंचित पीड़ित प्रकृति व मानवता कराह उठी प्रचंड

त्राहि माम् त्राहि माम् आवाज़ों से ईश्वर का ध्यान हुआ भंग

बीमारी का अस्त्र चला मानव को सबक सिखाते प्रभु की लीला के अंग

पुनर्जीवन पुनर्वालोकन पुनरुत्थान से शांत होगा ईश्वर का रंज

स्वच्छता पवित्रता सात्विकता सदजीवन जीने के राज चंद

पंचतत्वों का मान पंचविकारों पर नियंत्रण जीने की शान व उमंग

माया के पीछे भागती दुनिया माया से विरक्त हो समझी ज्ञान का तंज

ईश्वर के बनाये नियम कानून की सज़ा कठोर यदि करोगे भंग

दैवीय शक्ति का संदेश समझ माफ़ी माँगे और यह प्रण ले सबके संग

कोरोना वायरस की बीमारी से मिलेगी एक दिन निजात जीतेंगे हम यह जंग

न भूले हम कभी स्वयं परिवार व ईश्वर ने हमें संभाला जब छूटा संसार बेरंग

प्रयास करें सिर्फ हवा में तैरे प्रेम भक्ति हास्य मैत्री कला संगीत के अणु बन ख़ुशी व तरंग

देव कृपा से सब पहले जैसा हो जायेगा बीमारीमुक्त होंगे स्वस्थ जन

दौड़ेगा संसार फिर से समाप्त हो जायेगा मटमैली दुनिया का रंग

Check your life connections to stay happy

Our self world, family world and outer world, all are run by our different gurus.

The divine power to self power connection, there are various channels to follow to run our world happily,smoothly and peacefully.

So please check, if any of the given connections is loose or disconnected, you may have to face the problem.

Here is your life chart to follow:

God (divine guru universal)

Sadguru (spiritual guru personal)

Teachers(academic and worldly affairs gurus professional)

Parents (first guru and prime guru functional)

Wife (life guru and very close guru no optional)

Siblings (secret gurus occasional)

Children (young gurus inspirational)

Friends, neighbors and relatives (testing gurus vocational)

Self (smart guru by birth natural)

If any of the above link is broken, you may face problems in life.

If you don’t have any problem, all links are being taken care and well maintained.

Kudos ! You are happy soul on this earth.

kindly check your connections to stay happy.

Happy life and happy connections !

रंगो की फुहार

ऋतु परिवर्तन की आई संधि बेला

प्रकृति ने बिखेरे रंग वाह बसंत मेला

फागुन की पदचाप ने हर दिल टटोला 

प्रकृति का जादू मानव के सिर चढ़ कर बोला

अबीर मलती रंग उड़ाती गुलाल बिखेरती मस्ती का टोला

सुप्त संवाद में भर अमृत कान में फागुन संदेश घोला

शरद के अवसाद को फाग ने फिर से धो डाला

रंगो से भीगे मन में भड़का प्यार का शोला

फागुन पूर्णिमा पर चाँद हो गया और चमकीला

सुस्त चाल ने पहन लिए उत्सव के घुँघरू का गोला

प्रेम के रंग बड़े गहरे रहा न कोई शिकवा न गिला

पकवानों में ख़ुशी के जायके देख हमारा मन डोला

उमंग उत्साह ऊर्जा से भर हर कोई बन गया हरफ़नमौला

बासंती धरा पर नज़र आया इंद्रधनुष का उड़न खटोला

गोपियों संग रास रचाते वृन्दावन में राधेकृष्ण का हिंडोला

आज हर जीव रंग से होगा सरोबार नहीं रहेगा अकेला

प्रेमधुन जोड़ देगी दो दिलों को चलता रहेगा अनवरत सिलसिला

मंद जीवन में संचरित उच्च ऊर्जा का प्रवाह सबने सत्य कबूला

आज फाग से जी भर गले लग जा छोड़ दुनिया का झमेला

तन मन आत्मा की होगी एक साथ शुद्धि देख प्रभु कीअद्भुत लीला

फागुन आयो रे

फाग पूर्णिमा का सुंदर दिवस प्यार रोशनी ठंडक से जगमगायो

फाग की पूर्व संध्या में पवित्र अग्नि में दरिद्रता नष्ट कर सुख पायो

फाग की छुट्टी सब कामों से कर लो एक दिन की कुट्टी समझ आयो

फाग का त्यौहार सर्वप्रथम वृन्दावन के राधेकृष्ण संग मनायो

फाग के रंगबिरंगे फूलों संग प्रभु जी को जी भर के सजायो

फाग के मिलन ने प्रेम तरंगों में फिर उमंग जगायो

फाग की बयार व सुगंध से निष्प्राण जीवन में ताज़गी पायो

फाग की हँसी में दुनिया के सब गम भुला प्रेम व आनंद पायो

फाग के गीतों ने बचपन के भूले बिसरे दिन की याद दिलाओ

फाग में बजा ढोल नगाड़ा साथ सब मिलकर नाचे खूब संगीत रस बरसायो

फाग के अनूठे रंगो से सज गया तन मन घर आँगन सब हर्षायो

फाग की पिचकारी ने धो डाले वैर अवसाद बुराई की जड़ मिटायो

फाग में रंगो से रंगना गले लगना खुशियों के संदेशे से मन गुदगुदायो  

फाग के पकवानों की महक से बहकना जी भर कर ललचाना सब गप कर जायो

फाग की बैठक दोस्तों की रौनक से मज़ा कई गुना बढ़ जायो

फाग पर खेल खेलकर मनोरंजन व ख़ुशी में चार चाँद लगायो

फाग की ठिठौली मस्तों की टोली खूब हुड़दंग मचायो

फाग पर रंग न खेलने के बहाने कुछ सच्चे कुछ डर से भाग जायो

फाग को संजो कर रखना दिल में खूबसूरत याद जीवन की एल्बम में सदा बस जायो

Happy Women’s Day

What a woman want from man

Treat her like an equal human

A woman is the better half of man

But a man makes her identity alien

Give her land ,sky and water to grow

as a fully, fair and fearless woman

A little care she deserves when she is born

as she is tender gender initially needs but later grows bold

A little education in her childhood

as she can learn with her yearn

A little freedom to live thoroughly

as she is capable to fly on her own

A little love from her husband without a word

as a fuel to run her precious world

A little respect in the eyes of men

as she sees them equally and sensible men

A little space in her life

so that she can breathe as a normal person

A little membership in her in-laws’s house

as it is her extended family of Divine

A little decision-maker to participate

as she wants to feel connected and prime

A little support in her old age

as she deserves more but demands less in her golden age

A little comfort at home and office

as she feels guilty even to rest for minute one

A little security in and out of her home

so she can walk with high head and believe in opposite gender anytime

A little communication with her dear ones

As she wants to share her emotions and frustrations lifetime

A little network of her friends

As she could become freak and responsible too in no time

A little cooperation from her known ones

As she is capable enough to take care of her chores on time

A little understanding from her well-wishers

As she is human too and does mistakes often

A little blessings from parents and elders

As she adores not ignores them for their grace like sun

That’s what a woman want from man everyday         

to complete her world so that it can function in proper way

Celebrate each day as equal not gender biased day

No men’s day no women’s day but human’s day sanction Hurray !