जन्मदिन बदली प्रेमधुन

न झालर न गुब्बारे

न केक न मोमबत्ती

न खेल खिलौने न नई पोशाक

यह दिल न माँगे यह सब मोर

यह तो थी छुटपन की कहानी

लगती उम्र के इस दौर में कैसी बचकानी

बचपन जो चुटकियों में गुजर गया

जिंदगी ने बदली है नई करवट

अब वो पहले जैसा जन्मदिन कँहा रहा मेरे दोस्त

दूसरे दौर की कहानी भी हमे न अब रास आई

न फोटो लेने का झगड़ा

न पार्टी का लफड़ा

न रंगीले दोस्त न लॉन्ग ड्राइव

न छीनाझपटी न खिंचाई

जवानी सरपट निकल गई

यह उम्र भी जल्द ही निबट गयी

अब वो पहले जैसा जन्मदिन कँहा रहा मेरे दोस्त

तीसरे दौर की कहानी भी हमे न अब रास आई

न नाच गाना न डिस्को पार्टी

न होटल की चकाचौंध

न पैसों की चमक दमक

न लाइन में लगे लोगों की जीभ तरसती

न तम्बोला न गेम्स की शरारत मस्ती

व्यस्क होते होते कुछ पुरानी आदतें बदली

नई आदतों ने जिंदगी की और बढ़ाई खुश्की

जिंदगी के सुरताल पर नाचते रहे ढोल पीटते गाते रहे

सारी उम्र जन्मदिन ढंग बेढंग तरीके से मनाते रहे

चौथे दौर की कहानी भी हमे न अब रास आई

बस एक चीज़ जो हर बार छूट गयी थी

आज वही खूब अच्छे से नज़र आयी

न कभी खुद को पूछा न कभी खुदा को

दुनिया को बस लुभाते हँसाते मनोरंजन करते रहे

अधेड़अवस्था के जन्मदिन ने हमे सोते से जगाया

हे प्रभु एक विनती कर लो स्वीकार

इस बार का जन्मदिन मनाये तुम्हारे साथ

सुबह जल्दी उठ हुए तैयार थाली में सजाई चीज़े चार

एक गुड़ की डली सजी मज़बूत व मीठी सेहत हो भली

हरी इलायची सौंफ और मिश्री सुख शांति प्रेम में बनी रहे सुरुचि

प्रभु यह खीर जल्दी में बनायी है 

उज्जवलता पवित्रता और शुभता से भरी

यह तेरे मेरे प्रेम की मलाई है

एक चाँदी का सिक्का है रखा

भले ही दिल दुनिया से हो खट्टा

तेरे मेरे प्यार से दिल रहे सोना सरीखा

लगता है बरसों पुरानी रीत आज सच्चे दिल से है निभाई

अब वो पहले से भी अनोखा जन्मदिन मना रहा हूँ दोस्त

Happy Teacher’s Day

Mother gifted me birth

Father bestowed me life

Family showered me love

Society provided me name

My country made me proud

Something great was missing in my life

This universe was clearly visible

But still was not in my sight

 I was curious to know

Who am I ?

Why sky is blue and grass is green ?

I was not able to identify

All blessings in one divine

When I entered at school

There I found a teacher

Who held my hand with a smile

And took me to a joyride

When I noticed my teacher

I realised she carries my whole world

Who showed me a learning path

From my childhood till my young time

    Became my angel to make my life worth

She spent her precious time

And with me did all hard work

Never left me in midstream

Behaved in friendly manner

Taught me various life skills

Worldly knowledge in wide angle

Helped me to grow as a noble person

Always motivated me build your self potential

Failures are new lessons

Always strive for betterment

Success means chase more milestones

One day silently she released her hand

But still her hand is lighting my path

All in one she is super human

As a Mentor, guide and instructor

She took me to heights of splendor

I feel her blessings surrounding my world

Life teaches us many lessons

But there are only teachers who teach us

How to read and lead life in reality with worth

Whose presence is indispensable on the earth

Her contributions unending and unpaid

Make this world worthliving feature

I didn’t see God but found one in her

Great souls are produced as His wonders

Salute to her spirit and her true love

I pay my tributes to my teacher

Happy teacher’s day to all lovely teachers

क्या करूँ मेरी मैया ?

ज्ञान की छोटी सी थी मेरी नैया

अज्ञानता का बहता अथाह सागर 

गूढ़ ज्ञान से सँवरा मैं तो, माँ ने ली बलैया

तू कहती थी मेरी मैया

ज्ञानता ने सबको तारा, मेरे भैया

फिर क्यों डूब गयी मेरी नैया ?

जोश जूनून जज़्बे से भरा, मैं था तैयार, जैसे गौरैया

उड़ने को बेताब थे मेरे पँख, मैं था खुश, बन चिरैया

हौंसलों की उड़ान देगी तुझे मंज़िल, समझाई मेरी मैया

जिस सफर पर निकलना था, दम लगा के हैया

न जाने किस ने साधा निशाना, गोली चलाई, अब सब है भूल-भुलैया

उड़ने से पहले, धरती पर क्यों मैं आ गिरा, मेरी मैया

अस्त्र-शस्त्र, कला-कौशल से लैस रहना, मोरो कन्हैया

पहला गृह युद्ध ही मुझ पर पड़ गयो भारी, मेरी मैया

मैं अकेला, सामने दुश्मन की सेना, हाय टूट पड़ी दैया

गृह और सैन्य युद्ध, दोनों में हुआ परास्त, पड़ी काली छैया

मैं शक्ति से था भरपूर, विध्वंस हुई मेरी सपनों की शैया

हार कर उठने की शक्ति, कँहा से लाऊँ, मेरी मैया

पूरे दमखम, पूरे विश्वास से चलना, लल्ला, जीवन भूल-भुलैया

अबकी बार रहना होशियार, तू तो है मेरी भोली गैया

षडयंत्रो, विवादों, झूठ, जालसाज़ी में ऐसी फँसी, मेरी बैइया

बिखरा है तन-मन, कैसे जोड़ूँ, टूटी जीवन की नैया

बेईमानी और बहुरूपिया दुनिया में खूब हुई जग हसैया

न खेल सकेंगे, माफ़ करो, जीवन अजब खेल-खिलैया

शरीर और मन काम से कभी न थके, न टूटे सुन मैया

हमारे तो बदल गए सुर और ताल, जब झेली शनि की ढैया

तानों, व्यंगों, हँसी-मज़ाक, बेरुखी की लड़ी हमें खूब तेतैया

जिंदगी का एक आखिरी दाँव प्रेम पर भी लगा लो, बन सैंया

प्रेम छोड़ो, मैं तो जिंदगी से भी गया, अब सब सूना है मैया

मेरी किस्मत यँहा भी दगा दे गयी, सुन रही हो, मैया

बस अब बहुत सुन ली तेरी, अब मैं चलूँगा, मेरे मन की मैया

ऐसा दाँव खेलूँगा, नाचेगी यह दुनिया, ता ता थैया

झूठ, बेईमानी, मक्कारी में मुझ सा न होगा, कोई कटैया

महल, नौकर-चाकर, पैसों का गल्ला भर दियो, तेरा लल्ला, देख मैया

अब दुनिया मेरी मुठ्ठी में, सब गवां के अक्ल सिखायी, यह रूपैया

उलटी दुनिया को उल्टा पाठ पढ़ाना पड़ता है, अब समझा मेरी मैया

सीधी उँगली से घी न निकले, तो टेढ़ी करनी पड़ती है, समझी मैया

एक दिन मेरी चोरी पकड़ी गयी, अब जेल में बंद हूँ, मेरी मैया

उलटी गंगा बहा, उल्टे कर्म कर, पछता रहा हूँ, मेरी मैया

दीन-ईमान, सत्य, मेहनत, भगवान्, सब पकड़े, तो छूटी दुनिया

दुनिया पकड़ी, तो पड़ी हथकड़ी, मैं तो दोनों जहान से बौरैया

अब सब छूटा, बस न छूटे, तेरा पल्लू, वादा कर मेरी मैया

कृष्ण का कान्हा

हे कृष्ण

तुमको सहृदय आभार

कण कण में व्याप्त हो

करते सदा मेरा उद्धार

तुम्हे मुझसे प्रेम अपार

पंचतत्वॉ से गढ़ा मेरा सुंदर शरीर

तुम बन गए मेरे जीवन के पालनहार

सद्गुण संस्कारी परिवार में दिया जन्म

उत्तम मात पिता का रूप किया धारण

मुझ पर लुटाते रहे ढ़ेर सारा प्यार दुलार

मैं भूख प्यास से तड़पा

तो झट से बन गए मेरा आहार

संसार ने ली जब मेरी घोर परीक्षा

मैं द्रौपदी समान चीखा जब मेरा हुआ चीरहरण

तुम लिपट गए मुझसे बन वस्त्र

सदा राखी मेरी लाज मेरे मोहन

मैं गली गली भटका अनपढ़ गँवार यह तन

तुम आये जीवन में करने एक नया संचार

खोल दिए अनंत शिक्षा के द्वार भगवन्

मैं धर्म युद्ध में उलझा

अर्जुन समान हुआ असहाय हे वासुदेव कृष्ण

तब तुम विवेक व आत्मज्ञान के रास्ते

मुझे सुरक्षित निकाल लाये बाहर मधुसूदन

भाई बहन बांधव सखा का बन प्यार

रचा एक और दुर्लभ संसार

तुम बने मेरी प्रेयसी

बन राधा बहा दी प्रेम की अविरल धारा

मेरा स्वप्न किया साकार

बाल रूप में बने तुम मेरी संतान हे बालगोपाल

मैं कब बीज से बन गया पौधा

तुम चुपचाप करते रहे सुखों की बौछार

मैं कर्मक्षेत्र में हर तरफ से हारा

छल कपट झूठ बेईमानी हिंसा ने मुझे मारा

तुम साये की तरह रहकर साथ

करते रहे मेरे पथ के काँटे साफ़

मुझे उठा लिया गोद

जब थक कर मैंने छोड़ा घर संसार

मैं नासमझ कभी न समझा तेरा रूप

बन सच्चा मित्र तूने सदा मुझे संभाला

पर मैं रहा अनजान जैसे सुदामा

हर रूप में तेरा किया तिरस्कार

न रख सका तेरी कृपा का मान

न पढ़ सका तेरा संदेश जिसका गहरा मर्म

न बन सका सुपात्र हे करुनानिधान

जिस क्षण सौभाग्य से तुम्हे पाया

अगले क्षण खो दिया दुर्भाग्य हमारा

तू खड़ा रहा मेरे द्वार

तू क्यों न तोड़ पाया मोह के बंधन

मैं ही जीवन के दाँव पेंच में फँस कर

तुझ से करता रहा किनारा

आज धरा पर अनुपम तेरे जन्म की गूँज

पावन हुआ जग दोबारा

जन्माष्टमी में होंगे तेरे साक्षात् दर्शन

मैं अभी से हो रहा अभिभूत

अबकी बार न छोडूँगा तेरा हाथ

तेरी कृपा से तरना है मुझे

सुन लो मेरे नाथ

तू कृष्ण

मैं तेरा धूलिकण

तू सुदर्शन

प्रभु कृपा दीजिए दर्शन

तू लीलाधारी

तेरी लीला न समझ सका भोला मन

तू दृष्टा

मैं दृष्टिहीन जीवकण

हे कृष्ण

इस काया को बचा लो

कृत्घनता की कालिख लगी मेरे अंग

मैं तुझसे हूँ हरि

इस भाव में आकंठ डूबा रहे मन

चन्दन बन लिपटा रहूँ तेरे पाँव

जी चाहे कृष्ण का कान्हा कहलाऊँ

रहूँ न अब केवल मिट्टी का कण

जिंदगी एक मैराथन

जिंदगी दौड़ा रही है खूब

दौड़ रहे है सब, दम लगाकर

वक़्त पर पहुँचना है सबको

क्यों धीरे और सुस्त है, तेरे कदम

और तेज दौड़ों, नहीं तो छूट जाएगा

प्रथम होने का ताज़ोतख़्त, समझा कम्बख़्त

एकदूसरे को सब समझा बुझा रहे है

पर नहीं जानता कोई भी, क्यों है दौड़ना जिंदगी भर

कँहा है मंजिल, कितना है सफ़र

क्या दौड़ना ही है, जिंदगी का मक़सद

बस दौड़ते रहो, जिंदगी भर अँधाधुंध  

दौड़ के बिना, क्या नहीं कोई अन्य विकल्प

बिना रुके, बिना थके, बिना हमसफ़र

महत्वकांक्षा या मृत्यु, दोनों दौड़ का अंत

एकदूसरे के पीछे लगे है सब

फिर भी आगे बढ़ने की है तीव्र लगन

सबकी एक रफ़्तार, सबके एक जैसे कदम

पर फिर भी एकदूसरे को दिखाते

नहीं है हम, किसी चैंपियन से कम

गर नज़र भर देख लिया इधर उधर

हाथ से छूटेंगे ट्रॉफी, मैडल व ईनाम के सुनहरे अवसर

शरीर में नहीं है जान व प्राण

पर बढ़ चढ़ कर, सब करते शक्ति प्रदर्शन

ईंधन डाला है या नहीं, बेपरवाह तनमन

बस एक चिंता खींचे सबके कदम

नहीं मालूम, दौड़ना है या चलना है जिंदगी

सबकी गति अनियंत्रित, पुरजोर दौड़ते सब

कोई ख़ाक, तो किसी में बेजोड़ दमखम

वक़्त के साथ चलने में फिसलते कदम

एक पैर बंधा घर, दूसरा पैर नौकरी का बंधन

फिर भी दौड़ते प्यारे, सभी दनादन

गर शरीर रुकता है, तो दौड़ रहा है बेतहाशा मन

इस कालजयी दौड़ में सब है शामिल

वक़्त ने जोर से मारी है सीटी

दौड़ना दिलेरी और खुद्दारी है तो

रुकना है मना, थमना है मौत

गर रूककर, जरा सी भी ली साँसे

नतीजे सह न पाओगे, जनाब तुम

यह दौड़ है या पागलपन

न समझ सका इंसान, न रीतिरिवाज़ में बंधा मन

इस बेलगाम दौड़ में जीत जाते, कुछ खुशनसीब

पा जाते नाम, रुतबा,पैसा और हज़ारो प्रशंसा पत्र

मैं भी कभी इस दौड़ का हिस्सा था

अब हूँ बाहर, चलने का बस करता हूँ प्रयत्न

दौड़ना है यदि प्रतिस्पर्धा

तो चलना है जिंदगी का मज़ा

दौड़ता आदमी रह जाता है अकेला

सबको लेके चले साथ, तो दुनिया है मेला, मेरे हमदम

चाँद के चार शब्द

कल चाँद दिखा

एक चमचमाते तारे संग

बारिश से धुला निखरा

पूर्णिमा के तेज़ से था चौंधियाया

आज उसका स्याह पटल

मैं गलती से छत पर जा पहुँचा

तार पर टंगे सूखे गीले कपड़ों को लगा उतारने

पर वह मेरी नज़रों में उतर गया बिना यत्न

खूब चौंकाया उसके दीदार ने मुझे

पूरे शबाब पर जो था उसका यौवन

सावन के शब्द में निशब्द फैला था उसका गमन

काले बादलों को चीरता पुलकित भाव से लबालब

मैं कितनी भोली व भूली थी यथार्थ से निरस्त

न जाने जैसे उसका मुझ पर दबाव था या दस्तक

उसका उजलापन मेरे मैले मन को लगा कुरेदने

न चाँद न चकोर मेरा था प्रसंग मैं तो था बेहद तंगदिल

फिर क्यों हो रहा था आत्मविभोर मेरा चंचल मन

मैं भी रोज़ाना जिंदगी में घटता बढ़ता रहता हूँ

भिते भर अब रह गया है मेरा अस्तित्व व मन

वह इस घटना क्रम से कैसे उबरा

उत्कर्ष पर विराजमान था उसका सिंहासन

उसके गुमान से क्यों हो रहा था मुझे पीड़ा का अनुभव

पूर्णिमा की रात में दिखाता संपूर्णता का गजब दंभ

वह घने बादलों से आगे निकल खिला बन कमल

उसकी सुंदरता जैसे चाँदी से गढ़ी प्रतिमा का अनावरण

उसकी ताकत से क्यों संवरने लगा मेरा सुप्त स्वपन

मैं घर के बंद कमरों में रोज धीरे धीरे पिघल रहा था

वह मेरे गहरे अवसाद पर मल रहा था चाँदनी का चंदन

आओं मनाएं अपना आजादी दिवस

सोने सा दमकता भारत देश मेरा

चांदी सा चमकता विश्व में नाम तेरा

भारत है हमारा इश्के परवान

न्यौछावर इस पर हमारी दिलोंजान

मिटटी से इसकी निकलते वीर जवान

जांबाज़ों से सदा गूँजता नारा जय हिंदुस्तान

नदियों का उठता इसमें तेज उफान

हिमालय पर्वत सी देखो इसकी शान

हर धर्म, मत, संप्रदाय का मान हमारा संविधान

गर्व से सब कह उठते मेरा प्यारा हिंदुस्तान

सभ्यता व संस्कृति से सजी भारत भूमि पर हमें मान

ऐ माँ यह दिल तुझ पर कुर्बान कर सकूँ मेरा अरमान

सदियों पहले गुलामी की जंजीरों ने माँ से छीना सम्मान

आज़ादी की जंग लड़ वीरों ने बचाये भारत माँ के प्राण

देश भक्ति के हज़ारों रंगो ने मिलकर रखी इसकी शान

बलिदान की अग्नि में स्व की समिधा से गूंजा आसमान

देशप्रेम से बढ़कर नहीं होता कोई जज़्बा, कोई सम्मान

आज के शुभ दिन, वक़्त ने किया था, भारत माँ को सलाम

घोर संघर्ष के बाद भारत की आज़ादी का सपना हुआ सम्पूर्ण

जोश और जूनून से भरे भारतीयों को मिला,आज़ादी का सुकून

शहीदों ने लाल रंग से ओढ़ाई है, भारत माँ को चुनरिया, सीना तान

तिरंगे में सदैव लिपटी है, भारत की शान व अपनी पहचान 

दिव्य राष्ट्रगान हमारा, राष्ट्रप्रेम के प्रति अति सम्म्मान

अपनी आज़ादी की 75वी वर्षगाँठ का करे हार्दिक अभिनंदन

 देशवासियों को ढेरों शुभकामनाएँ व माँ को कोटि कोटि प्रणाम

जीवन हुआ सफल उसका, जो बन सका भारत माँ की सच्ची संतान

सब कुछ मिलता है जग में, पर नहीं मिलता यह चमन

और भारतीय होने का गर्व, पहचान व सम्मान

देशभक्ति के सर्वोच्च भाव से गर्वित है आज सारा जहान

मेरा देश चमके विश्व पटल पर, चम चम सूरज समान

सोने सा तपा भारत, कुंदन सा रूप, पहने पदम् विभूषण का सम्मान

आज़ादी है अपना हक़, मान-सम्मान, न भूले मेरा वतन महान

देश को आज़ाद, आबाद व अक्षुण्ण रखने का निश्छल प्रमाण

 अमर ज्योति सुनाती शहीदों का बलिदान, आओ करे पुनः उनका गुणगान

दिल से दिल को जोड़, हाथ में रख हाथ, शपथ ले आज प्रसन्न मन

हमारा साथ ही रखेगा सदा, सिर पर आज़ादी का ताज़ व सम्मान

जय हिंद

How worth human birth ?

Every single minute there is a new birth

HE is happy for HIS existence on the earth

HIS Blessings make rich million worth

 HIS grace is insignificant for poor no worth

HIS OWN SELF splits into two unequal mirth

Bloodlines have shaped into a solo life girth

Man reduced so much in behaviour a universal truth

Big circle of community turned into an individual wealth

Many lives crave for care and attention for human warmth

Humanity preserved lives for ages really praiseworth

HIS presence in NATURE support life at full length

HIS LIGHT spreads as power in human for every breath

Mankind is essential to save life even pennyworth

Human beings carry great value than any matter on earth

HIS PRESENCE is greatly felt in hands and hearts as a big strength

Time collapsed human structure to teach humbleness as a hard truth

No one paid heed to its odd steps human error found in depth

Subjects lost identities when machine replace human touch

New and exciting living culture is relevant than humans in search

HUMAN NETWORK  is badly broken who will carry its wellness torch

Man has become rich but poor as a human being any worth

MAN, MACHINE AND ROBOT have become TRINITY of earth

Blessings forgotten, differences maintained, kindness needs to unearth

Man is body,love is heart,a body without heart and soul,useless birth

Machine generates products but humanity generates blessed births on earth

Machine can fail man, divinity can withdraw power, man can become under worth

Man crossed his limits, his greed is eating his own self-worth

Human birth is blessing if the role of words and action truly match

Serve humanity, bridge the gaps, time taught us make life well worth

Neither machine nor a super human being, simple gestures of man count his net worth

 HUMAN NETWORK has great significance to sustain life on earth

Life is worth living when humanity is considered HIS GRACE as zenith

सावन या शिवकण

बरस रहा है सावन

बरस रही है शिव कृपा

मुझे भिगोते रहे, जल के अनगिनत नन्हे-नन्हे कण

भीगा तनमन, पाकर जल में उसका स्पर्श व दर्शन

मैं चला था मंदिर, शिव को भिगोने एक लोटाभर

पर शिव ने पहले मुझे भिगोया जी भर कर

भाव में भीगा मन हो गया जलमग्न

मानो शुद्धिकरण के बाद ही मिलेंगे दर्शन

मैं संशय, रोष, अतृप्त भाव से भरा था

अथक साधना के बावजूद मेरा जीवन व्यर्थ था

वह मुझे सावन की बूंदों में डुबो डुबो कर याद दिलाता रहा

गिलों से गल गया तू, शिकवों से न पा सका शिव तू

आ सावन की रिमझिम बूंदों का आशय समझे मिलजुल

तेरे बहते अश्रु कुछ पाने को

मेरे बहते अश्रु तुझ पर सब कुछ लुटाने को

भेद यह केवल लेने देने का

गर तू हो जाता तृप्त पाकर लक्ष्मीधन

और मैं निश्चिंत हो जाता देकर एक बार सिर्फ दर्शन

तो भक्त और कृपा का कभी न होता पुनः मिलन

यह प्यास तेरी जन्मों जन्मों की

यह कृपा मेरी युगों युगो की

यह दुःख, यह अतृप्त भाव ही तो है जीवन

साक्षी है यह तेरे मेरे पुनः अनुपम मिलन

यह रिक्ति ही है अनुरक्ति

समझा कुछ तेरा भोला मन

जुड़े है सुख दुःख तभी तो मिलते है हर जन्म

कुछ है आस, कुछ है प्यास, सिर्फ प्रेम ही है सच्चा धन

चलायमान है यह संसार और यह भाव

क्योंकि परस्पर विश्वास के है गहरे रुदन

मैं सावन से रिस रहा हूँ

तू भर ले हाथों में जी भर के कृपा के शिव कण

मैं ही शिव, मैं ही सावन, मैं ही कण कण

मेरी कृपा का बहाव बहता सदा तुझमें निरंतर 

सु(शांत) है कलाकार

कलाकार का जीवन कँहा होता है उसका अपना

वह तो कला की दुनिया के लिए ही है जीता

कला को सर्वस्व समर्पण करके ही है मरता

यह कहानी है उस नौजवान की जिसका नाम था सुशांत

जो आम आदमी से उठ बना एक नायाब कलाकार

एक कलाकार से बना फरिश्ता, फिर न जाने कँहा गायब हो गया

अचंभित रह गए जमीं और आसमां, न पाकर उसका नामो निशाँ

आम नहीं बहुत ख़ास था वो, कला का धनी था वो कलाकार

खुद के रास्ते ढूंढ़ता, चलता नहीं उड़ता था वो, पाकर खुला आसमां

काम का जनून, हौंसले बुलंद, खुद्दारी बहती थी उसकी रग रग में

शांत स्वभाव व ख़ुशदिल इंसान, कला का महारथी, चमक गया रातोंरात

पैसा, शोहरत, इज़्ज़त, लोगों का बेशुमार प्यार, सब पाया कदम दर कदम

पर उसकी थी कुछ अलग ही सोच, पाना था उसे कुछ अलग ही मुक़ाम

धरती का था आदमी, पर ख़्वाहिश थी उसकी, चाँद सितारों से भरा आँगन  

आसमान उसे लगता था कम, पूरे ब्रह्माण्ड पर नज़र का था शौक़ीन

कला के नए नए आयाम छुए, हवा से तेज़ चलने का होता था उसका प्रयत्न

धरती से बादलों का सफ़र, समय से पहले रखे, सातवें आसमां पर कदम

वक़्त उसे या वो वक़्त को उड़ा रहा था, बना अपना हमसफ़र

पुराना प्रेम एक दिन जो उससे रूठा, मानो भाग्य ने उसका साथ छोड़ा

आँख बंद कर उड़ते हुए ऊँचाइयों का ले रहा था मज़ा वो बेख़बर

फ़ूल से जुड़े काँटों के खतरों को न भाँप सकी भोली नज़र

हवा में पड़े पैर, तो वह जड़ों से उखड़ने लगा, बेख़बर

नए लोग, नए रिश्तें ,नयेपन से घिर गया उसका बैचैन मन

ईर्ष्या, अहंकार और लोभ की प्रतिस्पर्धा में उलझ गया कच्चा मन

खुद की गिरफ़्त में कैद, दुनिया से कट, वह तिल तिल मरने लगा

दुनिया में उसका नाम और काम चमक रहा था

पर वह अपनों से दूर बेगानों में खुद को ढूंढ रहा था

कलाकार था वो बाज़ीगर नहीं, रिश्तों की डोर में उलझा मन

शिकारियों की चाल में फँसने लगा परिंदा क्षण- क्षण

कलाकार का नाज़ुक होता है मन और कोमल होते है पँख

हवा से बातें करने वाला एक दिन यकायक, हवा में धूल का गुबार हो गया

पँख फैला कर उड़ने वाला परिंदा, पँखे से झूल, दुनिया से दूर हो गया

जब तक जिया शान से जिया, अद्भुत था वो इंसान और हरदिल अज़ीज़ कलाकार

कड़ा इम्तिहान लेती है कला और कभी कभी ले लेती है कलाकार की जान

सुशांत है अब शांत, पर कला के प्रति उसकी दीवानगी

धरती पर रहेगी, उसकी “ध्रुवतारे” सी पहचान

पाजामा जिंदगी

कोरोना ने बदली दुनिया और आम आदमी की जिंदगी

शरीर से जुदा हुई पतलून और अब है पाजामा जिंदगी

घर में ऑफिस, मंदा कारोबार, न सैर-सपाटा, न नाते-रिश्तेदार

घर बैठे है सब, पहन पाजामा, पतलून टंगी है हेंगर पर दरकिनार

पाजामे ने अब संभाली है कमान, आरामदायक और हवादार

बरसो बाद जिंदगी लग रही मज़ेदार, सुकून देता इसका दीदार

न झंझट कसे कपड़ो का, न साँस घुटती पहन पैंट, शर्ट, टी-शर्ट, जीन्स का भार

सफ़ाई, खाना, कपड़े और धुलाई, पाजामे ने सब सुख किए निसार

कँहा है जाना, बस पहने रहो पाजामा, चाहे जरुरी या घर के काम

योगा हो या पार्क की सैर, पाजामे से आसान हुए सब काम-काज

फल-सब्ज़ी या बाग़-बाग़ीचे की देखभाल, पुराने पाजामे में बेफिक्र करो जनाब

टीवी, दोस्तों से गप्पे, सोना या खाना-पीना, सुकून भरे पल पाजामे के संग

कोरोना का अब खूब है बहाना, आजकल बुरा नहीं मानता जमाना

 चाहे पहनो सस्ता या महँगा, देसी या ब्रैंडेड पाजामा

पाजामे में तैनात अब सब है सिपाही, जिंदगी का बदला पैमाना

जब जिंदगी की रफ्त्तार हुई कम, तो सबसे फिट बैठा पाजामा यार

पाजामा सब कपड़ों पर पड़ता भारी, करता नित नया ड्रामा बेशुमार

मुझे समझ नहीं आता, पाजामा क्यों नहीं बन जाता, अपना राष्ट्रीय जामा

पापा का सफ़ेद, मम्मी का रंगीन, बच्चों का आकर्षक व प्रिंटेड पाजामा

गर्मी ने किया हाय बुरा हाल, कोई ढूँढो, कँहा है मेरा पाजामा

ऑनलाइन क्लासेज में टीचर और स्टूडेंट, दोनों स्क्रीन से छिपाते पाजामा

ऊपर भले ही कुछ अच्छा सा पहनो, पर नीचे सदा ही पहनना “नालायक” पाजामा

कभी गलती से देख लेते, महंगे और ढेरों पड़े कपड़ों को, तो हँसता पाजामा

अब यही है तुम्हारी किस्मत, और हाँ, याद रखना, लेटेस्ट फैशन में है पाजामा

नींद, आराम, काम, बीमारी या फालतू पसरने का क़ानूनी वस्त्र पाजामा

न रंग, न कपड़े की गारंटी, बस बदल बदल पहनो, ढेरों वैरायटी का पाजामा

बच्चे से बूढ़े सभी होते खुश, पाकर उपहार में नया पाजामा

हाय पाजामा छाप हो गयी जिंदगी कंही तो छोड़ देता यह कम्बख्त पाजामा

एक वक़्त था जब पतलून के सामने टिकता न था यह पाजामा

सबको देख-देख पाजामे में, हम भी भूल गए सभ्यता व संस्कार निभाना

घर और बाहर, शान से पहन कर इतराना, मॉडर्न व ट्रेडिशनल पाजामा

पाजामे जैसी हो गयी है अब जिंदगी, ढीली-ढाली और आराम फरमाना

आज मंदिर जाने लगा तो पीछे से पत्नी की आवाज़ आई

सुनिए, चप्पल और पाजामे में ही मंदिर जाना, आसान रहेगा ध्यान लगाना

मैं तो सोच रहा हूँ, गर न होता यह खूसट, जिंदगी से चिपका पाजामा

मैं तो बेकार ही उलझा रहता, तंग और बंद कपड़ों में रोज पड़ता सिर खपाना

तभी गली से गुजरते लाउडस्पीकर पर कंही से आवाज़ आयी

हमारी दूकान का “फाजामा” जरूर खरीदना, “दो सौ में तीन” जल्दी सरकार

कसी और तंग हाल जिंदगी में पाना है कुछ आराम

तो जनाब हमारे “फैंट कम पाजामा” से बढ़कर, सौदा नहीं है लाजवाब

पैंट, जीन्स और ट्रॉउज़र का साहब, लद गया अब अंदाज़ और जमाना

डोरबेल बजी दरवाजे पर खड़े मिले शर्माजी, पत्नी ने साधा निशाना

सुनो जी, मैं जो बाज़ार से लायी हूँ लेटेस्ट पाजामा, उसी में मिलनामिलाना

हद हो गयी, जब लॉन्ग ड्राइव पर मैं निकलने लगा, तो सब ने सुझाया

आराम से पहनो पाजामा और बिंदास होकर गाड़ी चलाना

खिड़की से अंदर किसने है झाँकना, सफर रहेगा सुहाना

न बॉस, न मीटिंग, न गर्लफ्रेंड, न ससुराल, अब किसको है रिझाना

सबसे मुँह है छुपाना, तो पहन ले मास्क और मस्त पाजामा

कल तक लोग छुपाते थे, शरमाते थे, कम ही पहनते थे पाजामा

बुरा व ख़राब मानते थे, जो दिख जाता कोई, पहने हुआ पाजामा

पर अब ठाठ और शाही तरीके से, चौबीसों घंटे पहना जाता है पाजामा

पतलून से पड़ा धोना हाथ, कमर पर कस गया इलास्टिक वाला पाजामा

जिंदगी की रेस में,जो कल तक थे जीरो वो आज बने है हीरो, जैसे अपना नाड़े वाला पाजामा 

वक़्त की मेहरबानी हो तो, खोटा सिक्का भी चलता है जनाब, बिना बहाना

Love in the times of Corona

Life on the earth perturbed with bad breath

Corona Virus blocked road and air passage

Body weak, mind dreadful

Heart sank, emotions dearthful

Human life became so vulnerable, seemed no worthful

Life shrinked, world transactions synced without paper and ink

A silent killer in the atmosphere crossed borders without blink

Nature caressed green belt of the earth, blue sky became natural pink

Protocol for human life, maintain distance, mask and hygiene life link

Love encircled mankind, take deep breath, no action without think

Sweet time tasted sour suddenly

Grace period brought nectar in poison cup secretly

Corona infection cured, healed and recovered affectionately

“Blessing in disguise” Corona taught many lessons abruptly

Spring of dearness blossomed in every home garden miraculously

Eyes twinkled, honey sprinkled, body entangled in moon light

Immense warmth illuminated dim family bulbs at day and night

Children blessed, long awaited rest, heaven’s abode in nest, at first sight

No work, no salary, still life is happy and worth living, no fright

Closeness sparked magic of laughter, play, work and love fight

Human chain of donations, services and helping hands greatly entrust

Positive vibrations sent through messages and prayers to curb Corona’s disgust

Fondness with nature and books changed human looks and interest

In one full breath, romantic poetry and writings reached Mount Everest

Love aired through radio, mobile and television from East to West

Young and old both felt love could make anyone clean bold

New definitions of soft corners searched, perceived and pursued

‘Positive’ Corona dealt with ‘Negative’ practice when socially restrained

Man fought Corona, a terrible death, untill he last breathed

“Life is precious so is love”, humanity survived when hope nailed

Love cannot be cherished, valued and gained without great pain

Only truth and devotion can fill empty and needful domain

“Untouchability” again a curse on humanity as a “Corona Cult”

Love in the times of Corona “golden gift of God” became known fact

“Humane touch always worth a new life and birth” let’s enact

Happy Father’s Day

A mother is a heart of a home

but a father is a family’s lifeline

A simple family man, quite visible as divine

Centre of family, mother and children follow him day and night

The sole bread earner of the whole family always keeps head high

A family knight always carries his duties with patience and pride

An ordinary man for others, but a superhero for his tiny tots, a big surprise

Life is carefree for kids under his shadow, things are cool and paradise

Days are happy and nights are moon stories, father’s joyride

Loves deeply, spends lavishly, lives simply to keep his children happy

Provides wings to his children, to fly high with great ambition keenly

Noble soul, doesn’t take any credits for his children, acts in silent mode

A miniature God for every home, superb workforce, never gets old

Always smiles even when time is running even or odd

Sweet as well as strict to keep mind focus on right act

Home front or workplace, fights challenges with tact

Master of few words but action oriented quality

His efforts and funds are meant to feed his little ones in plenty

A role model for his children, father’s footsteps, want to imbibe truly

No one can match his charismatic personality and style

Father is like a mirror, he reflects our image in a better version

Aspirations and ambitions are nothing without his vision

No one can pay him back for his love, his presence and his endless confessions

His blessings and lessons are always everyone’s great possessions

God‘s replica in our life, his immense love known worldwide

Happy go lucky are those who feel blessed with father’s pride

Fathers are our real heroes who make our motives strong with positive vibes

Home, comfort, food are heaven’s sight and delight

Father’s grace like sunlight beams on every face for lifetime

Happy father’s day to all, enjoy his blessings, it’s a gala time

World Environment Day

Our earth is unique

An ultimate planet, the whole universe seek

The earth breathes,reproduces and is a source of delight

Only living planet that emerges out from bleak

We live on the earth, we all know

But the earth lives in our every breath at peak

Nature creates and cares, silent message in her deeds

Careless human beings behaved as meek

Five fingers represent five elements

Make it fist before the earth goes freak

Once we cared,lived together and prayed

The earth revived, it never looked so weak

Time alarmed and warned us umpteen, curb your bad habits

Adopt three R’s, rise,responsibility and right action will speak

Our future is nature, save it before things become reek

Grow plants,save trees,less pollution helps in retrieve

Green and clean drives assure its beauty and sleek

Stop wastage, no plastic, no paper, only simple things usage

Recycle thoughts,reuse efforts,reduce negativity,have sneak peek

The mother earth needs attention, dispose off her tensions and worries

More greenery, less machinery, care and cure, mutual toil

Let’s do our bit, to bring smile and colour on the earth’s cheek

कामवाली बाई की बाय बाय

बरसो की लगी कामवाली ने जब की बाय बाय

होश और अक्ल दोनों आ गए ठिकाने हाय हाय

मैं सही थी या गलत, आज तक समझ नहीं पाई

कोरोना काल ने ली सबकी कड़ी परीक्षा बिना पढ़ाई

पहले थे ढेरों बहाने, काम करने की नीयत किसी ने न दिखाई

जब गृहबंदी ने सब को किया लाचार और बराबर, भूले सब बड़ाई

“अपने हाथ में रखो  दुनिया” विपत्ति काल ने समझाई

जितना कर सकते थे किया, कामवाली बाई बनकर दुनिया पछताई

कोरोना का लगता था डर, पर थके शरीर ने कहा अब और नहीं भाई

इन सबके बावजूद मानना पड़ा, कामवाली ने विनय स्वर में पुकार लगाई

पैसे, चाय-पानी, नाश्ता, छुट्टी कभी भी बिना सुनवाई

पगार में हर साल बढ़ोतरी रखना, गर है मुझे यँहा टिकना है माई

 घड़ी घड़ी टाइम नहीं देखना, आज बस इतना ही निबटाने आई

त्यौहार के उपहार व भेंट या एडवांस पेमेंट में सबकी है भलाई

पुरानी नहीं चलेगी, नई चीज़ ही देना ठीक रेट पर भाई

देर सवेर अपनी मर्ज़ी का काम, ज्यादा बोली तो मैं चली अपने धाम

पसंद आये तो ही मुँह खोलियो, वर्ना शिकायत अंदर पी जैसा भी हो कामचलाई

इतनी आवभगत जी हज़ूरी तो पति सास  तक ने न कराई

घर की चारदीवारी, कोरोना की पहरेदारी, कामवाली की तिमारदारी सब निबटाई  

कमर टूट गयी, खुश न रख सकी घरवालों को, न ही कामवाली बाई

एक दिन सब्र का बांध टूट गया, गलती से मुँह खुल गया, बात संभल नहीं पाई

उसको सुधारने चली थी, अब  रोज़ कर रही हूँ तन मन की घिसाई

अज्ञानी को ज्ञान देने की कीमत चूका रही हूँ सुन ताई

अपने अहम् से ज्यादा उसके अहम् को रखना था ऊपर एक पाई

गलती मुझसे हुई आज, झेल रहा है पूरा परिवार बिना कसूर सज़ा पाई

सभी जुटे है मोर्चे पर, दिनरात लगकर भी है असफल हाय राम दुहाई

बीमारी गयी भूल, सेहत गयी झूल, कमाना गयी भूल, जीना भूली साईं

 किसी से तुम्हरी बनती नहीं, तानों से हो रही है खिंचाई  

हद तो तब हो गयी, जब घर वालो ने मेरा पक्ष छोड़  उसके समर्थन में हाँ में हाँ मिलाई

पुरानी तो शान से निकल गयी, मुझे पक्की कामवाली का पद दिला दौड़ लगाई  

सबसे अपना दुःख बाँट रही हूँ, लोग काम करने के नए नए सुझाव से हमदर्द बने बैठे है भाई

ऑनलाइन पर सफाई के आसान सामान की लिस्ट है मँगवाई

इस अधेड़ उम्र में शारारिक ऊर्जा के व्यय से गयी हूँ उकताई

टीचर कोरोना या कामवाली बाई दोनों की सख्ती ने दी जी भर के रुलाई

अच्छी खासी चलती फिरती जिंदगी को न जाने किस  बेरहम ने नज़र  लगाई

अब तो ईश्वर से है राहत की उम्मीद सच भौजाई आज तुम्हारी बहुत याद आई               

मज़दूर का मक़ाम

पृथ्वी का जब हुआ जन्म

मज़दूर भी जन्मा संग संग

बना मिट्टी और ख़ून का अनूठा बंधन

निभाता रहा चिरकाल तक निष्ठा संग

प्रण में बसा उसके पृथ्वी का सरंक्षण

मान सेवा सच्चा धर्म, कर्म से न डिगे उसके कदम

नहीं कंही भी एक अंश उसका हक़ और नाम

न पर्याप्त मज़दूरी, न दो मीठे बोल, न श्रेय, न सम्मान 

विरासत का रखवाला, सदियों से दबाता भेदभाव के रंज

मज़दूर की मज़बूरी ही बनी, उसके भाग्य का दंश  

खड़ा है सदियों से अपने पाँव पर, तपस्वी बन

ताकि मालिक बैठ बजाता रहे, सुख-चैन की बंसी की धुन

बंध भक्ति ने क्षीण की, तन की शक्ति और सुदृढ़ मन

पृथ्वी को माना अपना मालिक, सेवाश्रुषा में रहा मगन

दिनभर के थके मांदे मज़दूर के लिए, क्या गर्मी, क्या ठंड

पृथ्वी माँ की गोद में सोता जैसे पिघली शिलाखंड

सिर पर बोझ, कंधों पर जिम्मेवारी, ढोता रोज

खड़े है उसके पाँव, मानवता के लिए रखता उच्च सोच

जानता है समझता है उसकी परेशानी सारा गाँव

कँहा और कितने उठते है सबके हाथ और पाँव

न तन छुपाने को कुछ है और न है धन

दूसरों को धनी करता, कृशकाय मौन सज्जन

थकेगा तो पैर भार बैठ जाएगा

नींद आएगी तो ज़मींदोज़ हो जायेगा

 कुर्सी, मेज़, चारपाई, हकूमत करने वालो की फ़रमाईश

कुर्सी व आसन पर बैठने का भाग्य, उसकी किस्मत में नहीं भाई

उसके भाग में लिखा है चलना, दौड़ना, खड़े रहना या जमीं पर सोना

न की कुर्सी पर बैठना, बतियाना, फरमान सुनाना और रोब झाड़ना

मेहनत उसकी, सुकून दूसरों का, उसके ख़ून पसीने की सच्चाई

पढ़े लिखे सभ्य लोगों की दुनिया उसके दम पर चलती आई

चंद सिक्कों की बदौलत, मालिक मज़दूर देखते खुद को एक धरातल

वर्ना यह दूरी तो ईश्वर भी न पाट सके भाई

असभ्य और अनपढ़ मज़दूर तो बड़ वृक्ष सा खड़ा है

उसके नीचे पढ़ी लिखी सभ्यता का कोमल पौधा तना है

जानता है अपनी औकात इसलिए रहता है चुप

इस कुर्सी पर उसके सुख व अधिकार कंही है विलुप्त

उसका जीवन बैठने को नहीं, दो हाथ दो पाँव में निहित है उसका अर्थ

“अपने हाथ जग्गनाथ” की कहावत को करता बखूबी चरितार्थ

सफेदपोश लोगो को आराम पीठिका, कुर्सी व आसन पर बैठ करना राज

नीली वर्दी वाला अस्वच्छ समाज को स्वच्छ बनाता बिना शर्म व लाज

इस खड़े (असभ्य) और बैठने (सभ्य) के व्यवहार और भेद को बखूबी है वह जानता

वो मज़दूर है तभी तो पढ़े लिखे लोगो की सत्ता खूब संभालता

कुर्सी और जमीं, पैर पसार और खड़े पैर में जो रहता है अंतर

वही मंत्र इस संसार को चलाता है बिना प्रश्न उत्तर

गलती

गलतियों से बना मनुष्य, पुरानी कहावत खूब फलती फूलती

गलती करने को पैदा हुए सब, गलतियों से ही सबकी पहचान बनती

इतिहास गवाह है भयंकर गलतियों का, दुष्परिणाम सदा मानवता झेलती

मोहम्मद बिन तुगलक़ की राजधानी बदलने की संगीन गलती

हिटलर की अज़ीब सनक, मानवता का समूल नष्ट करने की दागी गलती

टाइटैनिक की डूबी किस्मत, मामूली सी गलती की सजा हज़ारो ने भुगती

नागासाकी हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराने की गलती भुलाये न भूलती

देश को हिंद और पाक दो टुकड़ों में बाँटने की ऐतिहासिक गलती

छोटी हो या बड़ी गलती, पूरे देश और समाज को विध्वंस कर निगलती

काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, अहंकार के मूल में गलती की होती उत्पति

गलती के दंड बड़े प्रचंड, क्षमा, हर्जाना, प्रायश्चित या प्राणदंड

गलती सब करते, पर न मानता कोई, न ज़िम्मेवारी में लेता दिलचस्पी

दूसरे की गलती, न काबिले माफ़ी, मौन व्यवहार में तुरंत बदलती

कुछ लोग गलतियाँ करते जानबूझकर, मज़ा या पीड़ा देने की प्रवृति

कुछ लोग अनजाने में करते गलती, फिर करते तुरंत भूल सुधार की प्रवृत्ति

गलतियों का सिलसिला न होता ख़त्म, कम या ज्यादा गलती सबको अखरती

कुछ गलतियाँ लगती बड़ी प्यारी, सँभालते सामाजिक ज़िम्मेवारी

कुछ गलतियाँ करनी है जरूरी, खाली जीवन को चलाने की मज़बूरी

मैं समझदार, तुम मुर्ख, इस गलती के आगे किसी की न चलती  

अमीर या गरीब, गलती किसी को न फलती

गलती कर सब पछताते, बार बार याद कर, दिल दुखाते

बीती बातें, बीती गलतियाँ, जिंदगी भर ढोने की गलती बहुत चलती

सुख की दृष्टि से देखे तो गलती भी भली लगती,

दुःख भरी सृष्टि गलती करने से स्पष्ट दिखती

मैं सही, तुम गलत, यह बात दुनिया क्यों नहीं समझती

दूसरे की गलती बड़ी व जल्द दिखती, अपनी सादगी भरी लगती 

जब होती गलती पर गलती, जेब और दिल दोनों पर भारी पड़ती

गलती नज़रअंदाज करने से न सुधरती

गलती का सामना करने से गलती की कीमत पता चलती

प्यार, शादी, बच्चे, शिक्षा, नौकरी, मकान, गाडी, ऐशो-आराम

एक से बढ़कर एक सब आँख बंद करी गलतियाँ, कँहा करी तेरी बंदगी

 गलतियों के महंगे परिणाम, जीवन भर की शर्मिंदगी

कभी कभी गलती को पड़ता गले लगाना रोकर, हँस कर या बिंदास

गलती के कारण हुए कई बेगुनाह शिकार

यह भी सच है पर गलती से हुए कई जादुई आविष्कार

धरती पर आये सब गलतियों का करने भुगतान

अब तुम्हे ही भूल बैठे भगवन इससे बड़ी गलती क्या होगी

जो गलती में भी देखता है निश्छल भक्ति

गलती से इस दुनिया में आये, गलती से चले जायेंगे

गलती का मर्म न समझने का दंड, इसी दुनिया में पायेँगे

गलती हमेशा गलत नहीं होती, कभी कभी गलती सही भी होती

गलती यदि गलत होती, तो शायद यह दुनिया ही न होती

गलती को मारो गोली, गलती साहसी लोगो का बल होती

वर्ना गलती के डर से दुनिया आगे बढ़कर प्रगतिशील और उन्नत न होती

तो करो जी भर के गलती और खूब सज़ा पाओ अपनी करनी की

क्योंकि दोनों जँहा में ईश्वर की ही चलती

बाकी दिखाने को कर लो जो मन मर्ज़ी

मैं तुम्हे भावनाओं में लपेटे जा रहा हूँ

और तुम गलती पर मेरे विचार पढ़ने में हो उलझे

कर रहे हो न एक और मासूम सी गलती

Zeal for Heal

Does your heart beat for humanity or no feeling?

World needs healing

Earth depleted, air polluted

Water contaminated, minerals and resources looted

Nature looks unpleasant and bared

World needs healing

Birds eloped, animals chopped

Trees cut and land sold

Helpless globe is crying for mercy

Man’s supremacy resulted into nature’s bankruptcy

World needs healing

Why we forget lesson of “Equality”?

Earth is for all living creatures, no one’s legacy

We owe to five elements for their kindness and courtesy

World needs healing

Love, peace and harmony, a trio of solidarity

Careless gestures are sorrows with huge penalty

Pandemic curse made life worse, disperse only positivity

World needs healing

“Care, Cure and Caution” are today’s necessity

“First deserve then desire”, things taken granted led to futility

We are on the ‘receiving end’ but ‘giving’ is an act of nobility

World needs healing

Do your ‘bit’ for the lamenting hearts

Tough time tests your abilities and efforts

Physical, mental and emotional health are big threats

World needs healing

“Self-care, self-reliant and self-work” need of the hour

Strong shoulders should support the feeble hands next door

Let’s all unite for making human chain strong once more

World is healing slowly

Every heart now beats and cares for humanity

Fight for Corona or for any natural calamity

No darkness can withstand light of divinity

World is healing hopefully

It’s time for each of us to be grounded in reality

Mutual love, care and trust bring tranquility

Let’s spread this great message to all as natural therapy

World is healing, isn’t it great feeling?

मेरे जीवन की किताब

किसी ने नाराज़गी से पूछा

कँहा रहते हो जनाब

अपनी घबराहट छुपाते हुए

हड़बड़ाते हुए मैंने दिया जवाब

ठीक हूँ बस सुनाओ अपनी बात

कैसे उसे बताता

कँहा बीत रहे है मेरे दिनरात

जीवन के सैंकड़ो पन्ने चारों ओर बेतरतीब फैले पड़े है

इन बिखरे पन्नों को सहेजने और समेटने में

मेरे जी जान अटके पड़े है

किस दुविधा में फँसा है मेरा मन

एक संभालता हूँ दूसरा पन्ना हो जाता है गुम

सुख दुःख की खेल कर अनगिनत पारियाँ

थक गया हूँ पर लिखने का सिलसिला है जारी

पहले पढ़ना लिखना सीखने में निकली उम्र

अब अक्ल आयी है तो बैठ गया हूँ

लिखने अपने सफर के चंद शब्द

गुलाबी जिंदगी के काँटो भरे अनुभव

जो पड़े थे कंही निःशब्द

जाने कब यह सफर शुरू हुआ कब होगा ख़त्म

श्वेत कागज़ पर चलती काली कलम

और श्वेतश्याम बालों को जोड़ती मेरे चेहरे की कलम

दोनों उलझनों में ढूँढ़ते कुछ ठोस कदम

आज क्यों जीवन अख़बार की रद्दी की तरह फालतू लग रहा है

अस्त व्यस्त जीवन से मैं हुआ पस्त

नए पुराने के झंझट को निबटाने में कट रहा है वक़्त

महत्वकाँक्षा की स्याही में डुबो डुबो कर इन पन्नों को रंगता रहा

रात रात भर जाग कर इन पन्नों में डूबता तैरता रहा

साथ साथ देखना समेटना संभालना भूल गया

भरी जवानी और रिश्तों की कर कुर्बानी

सालों साल बस एक धुन में लिखता गया

सब के सब पन्ने यादों की धूल से सने पड़े है

बस कुछ सुनहरे पन्ने ही सबसे ऊपर के खाने में पड़े है

बाकी सब संघर्ष की दास्ताँ से नीचे जमे पड़े है

आदमी बेनाम बनकर जीता तो अच्छा था

अनपढ़ होता तो अज्ञानता की ढाल से बच जाता

एक नाम एक पद एक सम्मान का लोभ

दो पैसों की ताक़त और उसका रोब

प्रशंसा पाने की चाह ने बदल दी

मेरी दुनिया और मेरी पहचान

जीवन को ऊँचा उठाने में मैं कितना गिर गया

बस यह मैं जानता हूँ और मेरा भगवान्

एक छोटा सा शब्द प्रोत्साहन, शाबाशी या निर्मल स्पर्श पा जाता

जीवन के खेल में हार के भी ख़ुशी को जीत जाता

इस कड़ी प्रतिस्पर्धा ने मुझे बहुत रुलाया और दौड़ाया

हार जीत से ज्यादा होता है आनंद का महत्व

बहुत देर में समझ आया

पास जो कोई बैठता पल दो पल

बात जो दिल की सुनता निश्छल

बस पूछ लेता थोड़ा सा हालचाल

मेरे होने के अहसास का न रखता कभी सवाल

तो खुदा कसम नहीं पकड़ता कलम

बिना मोल प्रेम के भाव बिक जाता एकदम

पर किस्मत को होता है वही मंज़ूर

जो बंदा मांगे होता उससे उलट जरूर

यह जीवन भी मेरा पन्नो की तरह बिखरा है

इन्हे संभालना मेरी जिम्म्मेवारी वक़्त बिफरा है

किससे करूँ शिकायत

इन पन्नों को लिखते रहना अब मेरी मज़बूरी

इन की गिनती अब मुझ पर पढ़ रही भारी

हाय मैं तो जीवन का एक कोरा कागज़ लेकर निकला था

वक़्त ने मुझ से मेरी पूरी किताब ही लिखवा डाली

करो (ना ) नवरात्र

धरती आकाश पाताल

तीनों लोकों में बजी

मृदंग की मधुर ताल

नव रूप में नौ शक्तियों से लैस

अम्बे हुई पुनः अवतरित

पूछने प्राणियों का हाल चाल

शक्तिहीन संसार कठिन करोना काल

पूछती भक्त से माँ एक सवाल

मैं आती करने तुम्हें धन धान्य से मालामाल

तुम रहते सदा ही दुःखी 

मेरे होते क्यों हुए तुम्हारे हाल बेहाल

आस्था और विश्वास से क्यों डिगे कदम                                                   

कभी न ख़त्म होता तुम्हारा मलाल

गर सुख मेरे जिम्मे

तो दुःख का हल भी मिलबाँट निकाल

कम से कम महाबीमारी में सेहत को रख संभाल `

दाती हूँ वरदाती हूँ

तेरा भला चाहती हूँ

सुख सारे चाहे दुःख से हमेशा भागे

मेरी भक्ति करके भी तुझमें निराशा जागे

कोई वस्तु बिना कीमत नहीं मिलती

भय बिना प्रीत नहीं फलती

अम्बे की शक्ति सिर्फ

भक्ति और प्रेम से मिलती

वर्ना पाकर भी गवां देता नासमझ संसार

तू माँगे शक्ति बिना भक्ति

बिना बने पात्र कँहा मिलता सुख सँसार

यश अपयश लाभ हानि जीवन मृत्यु

सदा चलते साथ प्रारब्ध का एक विचार

जीवन के कटु सत्य से क्यों नहीं तू दो चार

गर सुख माँगा है तो रखना सीख संभाल

गर दुःख भारी है तो हल्का करने में लगेगी मेहनत व साल

काल ने ली सबकी परीक्षा

क्या भक्त क्या दीन दयाल

जब तक मैं हूँ चिंता काहे की मेरे लाल

माना निर्बल हुई है संसार की चाल

पर काँटो की राह में चल कर ही मिलते फ़ूल

सबक है पुराना नयी है वक़्त की चाल

हर बार देने यह संदेश मैं धरती पर आती

कदम रुके है टूटे नहीं

साँसे बिगड़ी है आस अभी छूटी नहीं

करोना काल में स्वागत कर माँ का

आये शुभ नवरात्रे देख चुनरी का कमाल

ममता का बिगुल बजा जोर के आज

माँ ने सदा संभाली है लाज

कल नहीं तो परसों

खुशियों से दामन होगा पुनः निहाल