My school

Wahoo! I cherish my school immensely

We call it the temple of education generally

Learners pursue passion and compassion intensely

Gracious teacher glorify with grace greatly

Nurture and navigate my dreamboat nicely

Motivate me to mark my moment meticulously

Ambience for all round development amazingly

If I fell down yesterday stand up today confidently

Success a sweet fruit of perseverance consequently

Teach me share care and dare significantly

Humble attitude but fight for right smartly

Cumulative approach of body mind and soul equally

Never shed a path of supreme soul stay positively

Life is action not contemplation definitely

Imbibe goodness through golden rules honestly

Seek happiness in work never forget that rule completely

So be a soldier as action is s(word) face boldly

I owe my life my breath my vision truly

To my adorable academic abode actually

My school the lighthouse of my life constantly

May my learning abode dazzle perpetually in my province substantially

मजदूर दिवस

काम का चक्का
मैं मजदूर पक्का

न मजबूर

न मजलूम

न मुफ्तखोर

न मेहनत से जी चोर

काम का चक्का

मैं मजदूर पक्का

कंधे पर जिम्मेवारी पेट में आग

हाथ बंधुआ मजदूर

दिमाग में कुंठित जज्बात

पैर निरंतर चलते नापते संसार

काम का चक्का

मैं मजदूर पक्का

कर्म की बेड़ियों का जाल

खींचता मशीन वाहन मानवता विशाल

मुझे रुलाती पेट की ताप

तू हँसता पैसे का प्रताप

काम का चक्का

मैं मजदूर पक्का

मीलों चलता रेहड़ी ठेला रिक्शा ऑटो कार

मिलें चलाता घड़ी के काँटो सी तेज रफ़्तार

मशीन का पुर्जा मजदूर बनने में लगती ऊर्जा

घंटो की मशक्कत चंद पैसों की आमद

काम का चक्का

मैं मजदूर पक्का

दुनिया क्या चाहे कोल्हू का बैल

कम दाम सस्ती मजदूरी मजदूर के लिए मैल

मजदूर हूँ कमजोर नहीं कर्तव्यनिष्ठ हूँ कामचोर नहीं

मेहनती हूँ गुलाम नहीं जी हजूरी सलामी मेरा काम नहीं

काम का चक्का

मैं मजदूर पक्का

दिमाग की कसरत तेरी फितरत

शरीर घिसना मेरी किस्मत

मेहनत मजदूरी मेरा पसीना

मेरी विरासत मेरा नगीना 

काम का चक्का

मैं मजदूर पक्का

हाथ से मुँह तक का निवाला मेरा संघर्ष       

रोज खोदू कुआँ रोज खींचू पानी दुनिया न मेरी हमदर्द

सबके हिस्से जमीन जायदाद पैसे मोटी कमाई 

मेरे हिस्से मेहनत से जोड़ी पूंजी पाई पाई

काम का चक्का

मैं मजदूर पक्का

सच्चा सेवक सच्चा हमदर्द सच्चा मनुष्य

मजदूर के गुण मेरे भाई

चाहे वाजिब काम व वाजिब मजदूरी

बिना लाग लपेट बिना व्यवधान सच्ची कमाई

काम का चक्का

मैं मजदूर पक्का

न छोटा मेरा काम न छोटा मेरा हिस्सा

मुझे चाहिए मेरे हिस्से की जमीन व आसमान

इंसानो की दुनिया में मेरा भी हो

अपना हिस्सा रुतबा व पहचान

काम का चक्का

मैं मजदूर पक्का ….

Election

Charge intellect

Carefully select

Candidate elect

LokSabha election conduct

Government presentation expect

No bribe

No abduction

No intimidation

No plead

Potent political leaders lead

Soldier pride paradigm

Fearless farmer no crime

Worker wages no time

Woman child status sublime

Progress perpetual prosperity prime

Democracy appeal

Indians zeal

Autonomous government deal

Sovereignty solemnize real

Unity in diversity reveal

Conscience listeners

Decision makers

Bona fide voters

Parliament electors

Stable governance seekers

Honesty and transparency

Latest technology currency

Education to employment

Basic to specific requirement

Promise to procurement

Love thy nation

Every citizen contribution

Integrity in words and action

Solidarity and secularism no division

Veracious voter vote veneration

ऐ सखी घर मत बैठ

कुछ दिनों से हो रही फ़ोन पर वार्तालाप

बहुत सी सखियों ने डाली कान में यह बात

बस बहुत हुआ नौकरी का झंझट

अब घर बैठूँ तो बने कुछ बात

सालोंसाल इस कम्बख़त ने निगल लिए जज़्बात

न घर सम्भला न रिश्ते न सेहत न नौकरी

बनाती सबके बीच संतुलन बन बैठी एक पहेली

सबको खुश करने के चक्कर में खुद ले बैठी अवसाद

यह संसार के चारो कोने काहे को है थामे ?

जब घर के एक कोने में पा लेती संतोष की छाँव   

पूर्व में घर पति बच्चे पश्चिम में ससुराल व रिश्ते

उत्तर में नौकरी व संसार दक्षिण में स्वयं की सेहत व रखरखाव

पुरुषों से लगाती होड़ बन बैठी पुरुष जात

पर पुरुषों ने सदा ही संभाला एक ही मोर्चा की एक ही बात

सब जगहें हाजिरी लगाती पर सुख संतोष कही न पाती                   

घर की दुनिया कम थी समझने को

जो बाहर की दुनिया भी फ़तेह कर डाली

अब नौकरी से ले सेवानिवृति चैन से बैठूंगी

ढंग से जियूँगी अपनों के संग रहकर अपनों को ही खुश रखूँगी

पर ठहर थोड़ा रुक ऐ सखी

एक मिनट भली भांति सोच ले कर ले विचार

एक पलायन क्या दूसरी जगह देगा सुख का आँचल ?

बाहरी दुनिया को कर अलविदा घर देगा सुकून तुझे ?

कहने की है बाते कहने को है घर घर से बंधे रिश्ते

घर पर बैठने से पहले घर बैठे लोगो से भी पूछ ले

क्या घर बैठने वालो ने सुख है बटोरे ?

दुनिया का क्या है किसको जीने देती है ?

पूछ सवाल बार बार पढ़ी लिखी होकर भी तू है बेक़ार

अलमारी में पड़ी डिग्रियां ही पूछेगी बार बार

क्या है हमारी क़ीमत जो नौक़री छोड़ घर बैठी बेगार ?

कमाई जब होगी बंद क्या खर्चा करेगी अक्लबंद ?

आज के ज़माने में एक की कमाई से नहीं चलता घर बार

चार पैसे कमा कर ला फिर देख मुठ्ठी में घूमता संसार

सजना सँवरना मौज मस्ती घूमना फिरना यारी दोस्ती

फुरसत के दो पल गप्पे चुहलबाज़ी सब हो जाएगी बंद

घर को चमकाती रहेगी खुद की चमक पड़ जाएगी मँद

क्या बिना तनख़वाह बिना छुट्टी बिना पेंशन

बिना अनुमति बिना आजादी जी पायेगी दिन चार

जल्द ही जिंदगी लगने लगेगी बेकार

मेमसाब से बीबीजी फिर धीरे से कामवालीबाई का पदभार

सबको सुख देते देते खुद दुःख में डूबेगी बारबार

सबकी सुनेगी ताने बाते दुखड़े खुद का दुखड़ा किसे सुनाएगी ?

घर की चक्की में पिस कर रह जाएगी

फिर अपना दुःख हल्का करने को प्रभु भजन गायेगी

बाहर की दुनिया से कटकर सिर्फ घर की होकर रह जाएगी

समय की पाबंद सजसँवर कर समय पर ऑफिस जानेवाली

अब खुद के समय के लिए चिल्लायेगी

अस्त व्यस्त जीवन जीना होगा घर बैठ कर भी आराम कहाँ पाओगी ?

दिन कब शुरू कब ख़त्म खुद से प्रश्न पूछती रह जाओगी ?

आईना भी तुझ से एक सवाल पूछेगा ? कब सजेगी सवरेंगी कब मुस्कुराएगी ?

पर्स कपड़ें जुते तुझसे पूछेंगे हमें बाहर कब घुमाने ले जाएगी ?

दो नावों में पैर छोड़ क्या एक नाव में ढंग से पैर जमा पायेगी ?

नौकरी की ओट में क्या क्या छिपा था ?

अपना अस्तित्व आज़ादी सोच विचार सम्मान

फुरसत के कुछ क्षण खुद के पैसों की खुद्दारी नियमित जीवन

भले ही नौकरी बन गयी थी कांटो का ताज़ 

पर सिर उठा के चलती थी भले ही कल हो या आज

नौकरी का कर त्याग दे आत्मसम्मान की क़ुर्बानी

क्या तू घर की मसीहा बन पाएगी  ?

घर बैठे व्यक्ति की इज़्ज़त क्या ?

इज़्ज़त उसकी तब हो हाथ में काम व मोटी कमाई ज़नाब

चलती फिरती लक्ष्मी व सरस्वती का रूप छोड़

क्या बन सिर्फ अन्नपूर्णा अपना जीवन सफल कर पायेगी ?

माना संसार की सब शक्तियाँ है तुझमें

पर घर बैठ कर इन शक्तियों का कितना उपयोग कर पाएगी ?

घर का सुख या नौकरी का ऎश्वर्य दोनों तुझे खींचेगे

हर परीक्षा में खरा उतरना होगा कलयुग नारी की व्यथा न समझेंगे

दोनों का सुख पा सको मुट्ठी भर सौभाग्यशाली लोग

घर छोड़ कर किया बाहर का रुख अब वापसी कठिन प्रश्नावली

घर के झमेले या दुनिया के मेले दोनों को पाना व जीना दुश्वार

त्रिशंकु सी है स्थिति दोनों को है निभाना

आज की नारी देती हर परीक्षा परिणाम विस्मयकारी

न जीने देता घर न बाहर की जिम्मेवारी

सोच समझ कर निर्णय लेना संघर्ष भी तेरा युद्ध भी तेरा

परिणाम दूसरों के हाथ तेरा हाथ आज भी है खाली

केक

माँ अब केक नहीं बनाती

केक जो बहुत कुछ था

जन्मदिन त्योहार या कोई वार

हँसी थकी उदास जरुरत उलझन

कुछ मीठे की चुभन

झटपट करती केक का मर्दन

कुकर बनता भट्टी खाने की हो जाती छुट्टी

चॉक्लेट या सूखे मेवे रंगते प्यार के झमेले

पहले प्रभु फिर सब करते दर्शन

फूलता तो मन प्रसन्न

उदासी तो खोलता मन का एकाकीपन

केक बनता माँ का दर्पण

वक़्त सरका लोग खिसके केक दर-किनार

सख्त हिदायत में है माँ

बंद करो ये अपनापन

मैदा आंत में चिपकेगा रिश्ते कब्जायेगा

ये घी और मक्खन कौन खायेगा

प्यार की चिकनाहट कौन पिघलायेगा

और ये कम्बखत चीनी

बाप रे इस मीठे के रिश्ते को कौन निभाएगा

माँ शांत रसोई मौन रिश्तो में चुप्पी

खो गयी माँ के प्यार की सुगबुगाट

बस माँ अब उठो केक बनाओ

अपने नहीं तो परायों को अपना मान कर खिलाओ

ये केक, केक नहीं स्नेह व् ममता का प्रवाह है

प्रभु को तेरे केक की दरकार है

चुनाव

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में

बजा लोकसभा चुनाव के उत्सव का बिगुल

नई सरकार नए प्रधानमंत्री नए होंगे प्रतिनिधित्व

चुनेगी जनता मनपसंद सरकार कीमती वोट डाल

चुनावी दंगल में उतरेंगे कुछ खिलाडी कुछ अनाड़ी

कुछ मंझे कुछ नौसिखिये कुछ नए कुछ पुराने

लोकसभा सीट के दावेदार

करेंगे ढेरो चुनावी रैलियां और रोड शोज़

होंगी बड़ीबड़ी चुनावी घोषणापत्र की चर्चा रोज

खेलेंगे सब तरह के चुनावी दाँव पेंच

चलेंगे तरह तरह के चुनावी पैंतरे

शतरंज की भांति चाल

भोली भली जनता से चुनावी वादों की भरमार

देश की जनता को लुभाने की योजनाए का अम्बार

अपनी पार्टी का बजायेंगे शंखनाद प्रशंसा गुणगान

दूसरी पार्टी का पीटेंगे फटा ढोल बार बार कर परेशान

इस चुनावी उठापटक में पिसेगी जनता लाचार

देखेगी देश को चलाने वाले नेताओ की पोल खुलती बाजार

चाहे लाख दिखा ले खुद को चुस्त चालाक होशियार

पिछली सरकार थी निकम्मी नाकारा व नींद का झोल

देश का किया बेडा गर्क नेता न समझेंगे तोल मोल के बोल

देश के उजले राजनेता पहन सफ़ेद कुरता

उछालेंगे कीचड़ एक-दूसरे पर कर राजनितिक वार

खुद की नीयत साफ़ बता दूसरे के निकालेंगे खोट

क्योकि यह है वोटो की राजनीति

जनता की वोट पर चलेगी इनकी बोट

जनता का विश्वास जीतने में कसेंगे कमर

नोट से वोट तक न छोड़ेगे कोई कोर कसर

भिन्न भिन्न ठन्डे मुद्दे किये जायेंगे फिर से गरम

चुनाव जीतकर कुर्सी पाकर यह मुद्दे ठन्डे बस्ते में हो जायेंगे बंद  

कोई बुनेगा बेरोजगारी गरीबी शिक्षा व् स्वास्थ का जाला

कोई मंदिर मस्जिद भ्रष्टाचार महंगाई घोटालो का देगा हवाला

कोई बिजली पानी पेट्रोल मूलभूत सुविधाओं बुनियादी ढाँचा की देगा फेहरिस्त

कोई आरक्षण पर्यटन विकास पर्यावरण राष्ट्रप्रेम की देगा जीस्त

जवान किसान विज्ञान देश की सुरक्षा का लगेगा नारा

गर न की औरतो की सुरक्षा की बात

शिक्षा कारोबार संसद तक विस्तार

इनकी वोट के बगैर हर सरकार हो जाएगी कमजोर व बेकार

बड़े बड़े नेता करते बड़ी बड़ी बातें दिखाते बड़े बड़े सपने

जरा पूछो इनसे गर यह देशभक्त तो क्यों न बना सके

72 सालो में देश को भ्रष्टाचार गरीबी बेरोजगारी अशिक्षा आरक्षणमुक्त सरकार

जनता क्या चाहे इनसे बातें सिर्फ चार

हर पेट में हो अन्न हर हाथ में रोज़गार हर सिर पर छत

हर तन पर कपडा हर हाथ में अपने हिस्से की पगार

हर पैर के नीचे पक्की सड़क पुल पार्क बस रेल

हर लड़की को मिले सुऱक्षा सफाई स्कूल स्वावलम्बी का वचन

हर बच्चे के भाग्य में खेलकूद शिक्षा हुनर प्रशिक्षण

हर गृहणी चला सके निश्चिन्त घर बार

हर बीमारी का मिले सरल सहज सुलभ इलाज

दो कदम की दुरी पर हो स्कूल कालेज बस हस्पताल

बुजुर्गो को मिले ससम्मान सभी सुविधाएं बिना झंझट बिना इंतजार 

जनता चाहे इन प्रश्नो के उत्तर बिना इंतजार

बेरोजगार युवा पूछते कब मिलेगी सरकारी नौकरी मेरे सरकार

गृहिणी परेशान महंगाई की मार से क्या लाये खिलाये परिवार

क़र्ज़ से परेशान किसान करते आत्महत्या

महंगी शिक्षा माँ-बाप बच्चो को क्या शिक्षा दे पढ़ाने से लाचार

बिजली पानी पेट्रोल की समस्याएं पकड़ती जोर

स्वास्थ स्वछता पर्यावरण मुद्दों से बेपरवाह सरकार

महंगे मकान महँगा यातायात महँगा कपडा महँगा भोजन

क्या करे कही महंगाई कही भ्रष्टाचार जनता सब ओर से बेजार

राष्ट्रहित की बातें करते करते

पार्टी हित व् स्वयं हित पर लटक जायेगी बात

बड़े बड़े नेता न समझेंगे छोटी सी बात

गरीबी हटानी है तो भीख न दो

बेरोज़गारी कम करनी है तो बेरोज़गार भत्ता न दो

अशिक्षा मिटानी है तो शिक्षा न करो सामर्थ्य से बाहर

मूलभूत सुविधाएं जनता का अधिकार

जो पेट काटकर देते कर सरकार पर कर विशवास

ब्रेन ड्रेन की मार से बचाओ देश परिवार

कृषि प्रधान देश में कृषक की बचे मेहनत व् प्राण

भ्रष्टाचार से मुक्त करना है देश तो करो पहली बात

राजनेता स्वयं पालन करें ईमानदारी का पाठ

बात करते दिन रात जनता के कल्याण की

न लेते जिम्मेवारी आपदा हादसों व् देश पर कुर्बान जवान की

आरक्षण मुक्त जाति मुक्त करें शिक्षा व् रोज़गार

काबलियत को दे प्राथमिकता

सुअवसर दे सबको सरकार

बेईमानी घूस काला बाज़ार काले धन की चोरी पर कठिन कारावास

बलात्कारी को दे फांसी अपराध मुक्त क़ानून देश सरकार

विज्ञान की तरक्की में लगे पैसा

औजारो हथियारों के घपले से मुक्त हो देश

देश का प्रतिनिधित्व करे ईमानदार शिक्षित काबिल युवा

देश को नहीं चाहिए अपराधी बेईमान देश-द्रोही प्रत्याशी उम्मीदवार

खेल मनोरंजन पर्यटन को दे प्रमुख स्थान

सोशल मीडिया पर पकड़ हो सरकार की

कही यह न पार करदे हद देश की जानकारी का कर दुष्प्रचार

अब बारी जनता की देश की बागडोर इनके हाथ

कर मतदान में सहयोग

बनाये एक पक्की मज़बूत सशक्त सरकार

देख भाल कर जांच पड़ताल कर सोच समझ कर

करना अपने वोट का इस्तेमाल

क्यूंकि आपके एक कीमती वोट से बदलती सरकार

आपकी हिस्सेदारी निर्णय व चुनाव का कदम

देश के भविष्ये को ले जाएगा स्वर्णिम युग की ओर

तो चलो डाले वोट जिसके दिल व वादे में न हो कोई खोट

जो हो जनता का सच्चा सेवक क्यूंकि देश हमारा 24 कैरट गोल्ड

माँ अम्बे को नमन

नारी सम्मान ?

चैत्र नवरात्र                                       

देवी दर्शन से वापसी

ट्रैफिक लाइट में मिली

एक छोटी सी भिखारिन

वो बेबस समाज से

मैं बेबस परिवार से

दोनों प्रश्नवाचक

एक नारी के दो रूप

एक सड़क

एक घर

घर से सड़क आसान

पर सड़क से घर बमुश्किल

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

त्रिदर्शन

त्रिरूपा देवी

त्रिनारी धरती की

सदाचारी संसारी व्यभिचारी

घर

नौकरी

मायावी

कलयुग की रीत

घर पुराना

नौकरी बमुश्किल

मायावी नचाती

झूमे संसार यही रीत

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

क्षमा प्रार्थना

देवी

तुम शक्ति

तुम संसार

तुम प्रीत

आ धरती को पावन कर

पापी मन हुआ अधीर

तुम सक्षम

मैं निर्बल

माफ़ी मिलेगी या पीड़

पतन की ओर अग्रसर संसार

देवीकृपाविहीन

शंखध्वनि अवतरित

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

दुविधा

कंजक जिमाने का दिन

पूरी तलती

सोचती घर बिठाऊं या दू मंदिर

संपन्न परिवार की दिखती नही

दरिद्र कन्या पूजन

संसार की रीत नहीं

देवी सामने

पर देवी के रूप

स्वीकार्य नही

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

देवीकृपा

जीवन चलता

द्वि शक्ति से

देवी शक्ति

स्वयं की शक्ति

दोनों मिली

जीवन सफल संपन्न सम्पूर्ण

देवीकृपा क्षीण

स्वयं प्रयासरत

जीवन प्रार्थना प्रायश्चित प्राणहीन

देवीकृपा प्राप्त

स्वयं की शक्ति क्षीण

जीवन सादा सूक्ष्म सेवा

जीवन के तीन क्रम

~मंजू काव्या

शहीदों को श्रद्धांजलि

पुलवामा में CRPF जवानो पर हुआ आतंकी हमला

भारतमाता व जन्ममाता दोनों की रूह कांपी छाती फटी

दिल के टुकड़े हुए हजार आंसू बन निकले सैलाब

सूनी हो गयी गोद मांगे उजड़ गयी

बच्चे हुए अनाथ बेसहारा हुए माँ – बाप

हर भारतीय की आँखें हुई नम श्रद्धा से झुका सर

बेटे कर गए गर्व से पूरा फर्ज चुपचाप हुए देश पर कुर्बान

आतंकवाद के शैतान ने धूर्तता से निगल लिए चालीस जवान

आतंकी जानते थे अखंड भारत की असीम शक्तियों को

भारत के वीर सपूतो को उनके अदम्य साहस बल शौर्य को

जानते थे भारत की एकता पराक्रम व् जज़्बे के सामने न टिक पाएंगे

अपनाया कायरता कमज़ोर व् नीचता का रास्ता

पीठ पीछे किया वार मानवता को किया शर्मसार

हिम्मत होती तो सामने आते और करते वार

मुँह तोड़ जवाब देते भारतीय जवान दिखा देते बुरी नज़र रखने के परिणाम

छल कपट छदम वेश का ले सहारा मासूम जवानो को मारा

दिखा देते जो दुश्मन बन सामना करते तुम्हारी औकात हमारी जूती के पैरों तले

अरे ओ इंसानियत के दुश्मनो तुम देश प्रेम क्या जानो

देश पर मर मिटने का गौरव देश पर कुर्बान होने की शान

ले आतंक का सहारा देश में फैलाना चाहते थे डर आतंक व् फूट का विष भरा प्याला

अफ़सोस हमें सिर्फ इतना होगा की सामना डरपोक भगोड़ो व् बेगैरत दुश्मनो से हुआ

हम तो सर पर कफ़न बाँध कर चलते है हर दम तैयार

देश पर जान लुटाने को तैयार हर सांस देश के लिए समर्पण

देश वासिओ की सुरक्षा परम कर्त्तव्य निभाने को तैयार

तुम मेरे शरीर के टुकड़े कर सकते हो पर मेरे देश के नहीं

तुम मुझे गोलियों से छननी कर सकते हो पर मेरे देश की लाज को नहीं

चाहे युद्ध का मैदान चाहे गश्त पर चौकसी करता जवान

हर हमले में दुश्मन से भिड़ जाऊँगा देश के झंडे व् सम्मान की रक्षा के लिए मिट जाऊँगा

मेरे रक्त की एक – एक बूँद जब धरती को छुएगी

मैं शहीद कहलाऊंगा देश के लिए जीया देश के लिए मर जाऊँगा

इतिहास के सुनहरे पन्नो में भारत माता के दिल में

हर भारतीय के गौरव में सदा जीवित रह जाऊँगा गर्व की मौत गले लगाऊंगा

ऐ आतंकवाद तुम यह ध्यान रखना दिमाग में बात बैठा लेना

एक एक जवान जब शहीद होगा सौ- सौ नए पैदा होंगे

तेरी सब चाल विफल कर देंगे तेरे बुरे इरादे रौंद कर दम लेंगे

मैं मर कर भी इतिहास में जी जाऊंगा

देश के लिए मरकर पुनः देश के लिए पैदा हो जाऊंगा

देश की मिट्टी से हर बार तिलक लगाऊंगा जीवन सफल कर जाऊँगा

आतंक के खिलाफ भिड़ जाऊँगा इंसानियत को हर हाल में बचाऊंगा

मेरी शहादत व्यर्थ न जाएगी मेरे रक्त की एक एक बूँद का बदला लेंगे मेरे साथी जवान

हर जवान का प्रण होगा आतंक का खात्मा

जिन्दा रहेगी इंसानियत अमन प्रेम व् विश्वास

130 करोड़ देश वासिओ का देश हर अन्याय आतंक व् अराजकता पर पड़ेगा भारी

जिसने भी मानवता का उड़ाया उपहास तबाह कर डालेंगे आतंकी व् अत्याचारी

आतंकी को नर्क में भी न मिलेगी जगह अपने कृत्यों पर पछतायेगा

आतंकवाद का न चेहरा न धर्म न दीन  ईमान न नीयत

सिर्फ लूटता हर धर्म जज़्बे इंसान व् ईश्वर के रचे स्वर्ग को

बदला बदला बदला हर जवान आतंकवाद से पुरज़ोर बदला लेगा

तुम आतंक भय व् अन्याय से दुनिया पाना चाहते हो

पर तुम यह क्यों भूल जाते हो इंसानियत का जज़्बा सर्वोपरि

देश प्रेम सर्वोच्च उपलब्धि मिट्टी का क़र्ज़ सबसे बड़ा फ़र्ज़

विश्व शान्ति विश्व प्रेम विश्व एकता जोड़ती हर देश देशवासी हर जज़्बे को

तुम्हारी क्या हैसियत तुम्हारे क्या हौंसले सम्पूर्ण विश्व की शक्ति की बराबरी करने चले

तुम्हारे देश ने तुम्हे क्या यह छोटा सा पाठ न सिखाया

इंसानियत की बनो ज़िंदा मिसाल मर मिटो देश के परम कर्तव्यों की पूर्ति के लिए

आतंकवाद तुम मानवता पर लगा सबसे बड़ा कलंक व् धब्बा हो

तुम्हे विश्व में जड़ से उखाड़ना हर भारतीय जवान का परम कर्त्तव्य |

जय हिन्द

भारत माता की जय

शहीदों को नमन व् कोटि कोटि प्रणाम

~ मंजू काव्या