अटूट कुछ रिश्ते अनमोल कुछ बंधन
जज़्बात में भीगे और पिरोए गए एक सार एक मन
जैसे सुच्चे मोती जड़ी एक माला में दमकता स्वर्ण
यह देव तार बंधे और सुनाते सदा दिलों की धड़कन
न वक्त न उम्र न औपचारिकता न जुबान के मोहताज
बसते है भाई बहन के रिश्ते दोनों की आंखों में रहते सदा नम
फिक्र और फक्र का सुंदर अद्भुत वा गहरा लिए अहसास
जब भी मिलते बैठते बतियाते दोनों भाई बहन हिलमिल
वक्त बेवक्त फुर्सत निकाल पूछते दिलों का खयाल हर हाल
पल सदा वह अंकित हो जाता सदियों तक यादों में संभाल
खास खूबसूरत और खुशी में जुड़ते रिश्ते कोमल मनोभाव
अलग अलग बातें अलग अलग अंदाज कभी कमाल या कभी धमाल
याद दिलाने को यह पावन वा गरिमापूर्ण रिश्ता
आता रक्षा बंधन का त्यौहार श्रावणी पूर्णिमा के वार
कितना गूढ़ कितना जरूर प्रेम बढ़ता दृढ़ विश्वास वा सुप्रयास
मनाने हर्षोल्लास न कही शिकवा न गिला धूल जाता सब गुबार
बचपन में बोये यह स्नेह के पौधे सपरिवार वा सुसंस्कार
सदा खिलते महकते चहकते जैसे वृक्ष सदाबहार हर्षृंगार
बाल पके तो पके यह रिश्ते न पकते न थकते न मुरझाते
बस रहते सदा शानदार रंगदार वा ख़ुशगवार
भाई की कलाई जब सजती राखी से प्रेम से नाजों से लाडो से
शुभ वेला करती बहना भाई से दिल से मान मनुहार
फिर से जीवंत हो जाते जागृत हो जाते सभी सुप्त भाव गुलों गुलज़ार
बांध शगुन का धागा भाई को एक मीठा गीत सुनाती बहना
सदा पास रहना सुख दुःख सब एक साथ सहना परस्पर मानना कहना
कृष्ण सी प्रीत कृष्ण सी रक्षा कृष्ण सरीख सखा सदा तुम रहना
लेती बलाई बहना भाई पर होती निहार देती सबकुछ वार क्या कहना
सुन प्यारे तुम कभी नटखट कभी सयाने इस अटपट स्नेह के गहरे मायने
लाई बहना लाल रंग में भर अपार स्नेह
पीले रंग में दिव्य कृष्ण रूप स्वयं में उपहार
हरे रंग में सजी हरियाली यही रंग है खुशियों का सार
तीन रंगों में सिमटा त्रिगुणी भाव स्नेह साथ और सुविश्वास
माथे पर अक्षत वा चंदन का मंगल टीका करती बहना
तुम चंदा समान चमकना भाई सर्वश्रेष्ठ वा सर्वगुणसंपन्न
मिष्ठान से बढ़े प्रेम का जायका और आरती से ईश लगन
यह सुंदर भाव तृप्त करे चाहे संसार चाहे नैया भव पार
आजीवन चले हम जैसे चले आती जाती श्वास
दुनिया भले ही हो जाए बेगानी रहे हंसती बसती रहे हमारी कहानी
हर बंधन के कुछ मायने कुछ शुभ गुण कुछ संस्कार
कुछ प्यार कुछ तकरार लेकिन सिर्फ थोड़ा सा थोड़ी बार
सच्चे प्रेम में भक्त या भगवान दोनों ही पुलकित हो बंधे रहते ससम्मान
रेशम के धागे या दिल के धागे बंधे दोनों एक वचन एक समान
एक स्थूल तार एक सूक्ष्म तार पर दोनों में भरा गहरा भाव संचार
रक्षा बंधन सर्वोपरि बंधन आलौकिक बंधन फलता शुभ कर्मन
महाप्रेम रचित महाबंधन यह रक्षा सूत्र अभिन्न जीवन अंग सिर्फ प्रेम सूत्र
पर्व मनाते सगर्व सब संग जिसमें विष्णु महाअवतारी प्रकटे स्वयं