कोरोना ने बदली दुनिया और आम आदमी की जिंदगी
शरीर से जुदा हुई पतलून और अब है पाजामा जिंदगी
घर में ऑफिस, मंदा कारोबार, न सैर-सपाटा, न नाते-रिश्तेदार
घर बैठे है सब, पहन पाजामा, पतलून टंगी है हेंगर पर दरकिनार
पाजामे ने अब संभाली है कमान, आरामदायक और हवादार
बरसो बाद जिंदगी लग रही मज़ेदार, सुकून देता इसका दीदार
न झंझट कसे कपड़ो का, न साँस घुटती पहन पैंट, शर्ट, टी-शर्ट, जीन्स का भार
सफ़ाई, खाना, कपड़े और धुलाई, पाजामे ने सब सुख किए निसार
कँहा है जाना, बस पहने रहो पाजामा, चाहे जरुरी या घर के काम
योगा हो या पार्क की सैर, पाजामे से आसान हुए सब काम-काज
फल-सब्ज़ी या बाग़-बाग़ीचे की देखभाल, पुराने पाजामे में बेफिक्र करो जनाब
टीवी, दोस्तों से गप्पे, सोना या खाना-पीना, सुकून भरे पल पाजामे के संग
कोरोना का अब खूब है बहाना, आजकल बुरा नहीं मानता जमाना
चाहे पहनो सस्ता या महँगा, देसी या ब्रैंडेड पाजामा
पाजामे में तैनात अब सब है सिपाही, जिंदगी का बदला पैमाना
जब जिंदगी की रफ्त्तार हुई कम, तो सबसे फिट बैठा पाजामा यार
पाजामा सब कपड़ों पर पड़ता भारी, करता नित नया ड्रामा बेशुमार
मुझे समझ नहीं आता, पाजामा क्यों नहीं बन जाता, अपना राष्ट्रीय जामा
पापा का सफ़ेद, मम्मी का रंगीन, बच्चों का आकर्षक व प्रिंटेड पाजामा
गर्मी ने किया हाय बुरा हाल, कोई ढूँढो, कँहा है मेरा पाजामा
ऑनलाइन क्लासेज में टीचर और स्टूडेंट, दोनों स्क्रीन से छिपाते पाजामा
ऊपर भले ही कुछ अच्छा सा पहनो, पर नीचे सदा ही पहनना “नालायक” पाजामा
कभी गलती से देख लेते, महंगे और ढेरों पड़े कपड़ों को, तो हँसता पाजामा
अब यही है तुम्हारी किस्मत, और हाँ, याद रखना, लेटेस्ट फैशन में है पाजामा
नींद, आराम, काम, बीमारी या फालतू पसरने का क़ानूनी वस्त्र पाजामा
न रंग, न कपड़े की गारंटी, बस बदल बदल पहनो, ढेरों वैरायटी का पाजामा
बच्चे से बूढ़े सभी होते खुश, पाकर उपहार में नया पाजामा
हाय पाजामा छाप हो गयी जिंदगी कंही तो छोड़ देता यह कम्बख्त पाजामा
एक वक़्त था जब पतलून के सामने टिकता न था यह पाजामा
सबको देख-देख पाजामे में, हम भी भूल गए सभ्यता व संस्कार निभाना
घर और बाहर, शान से पहन कर इतराना, मॉडर्न व ट्रेडिशनल पाजामा
पाजामे जैसी हो गयी है अब जिंदगी, ढीली-ढाली और आराम फरमाना
आज मंदिर जाने लगा तो पीछे से पत्नी की आवाज़ आई
सुनिए, चप्पल और पाजामे में ही मंदिर जाना, आसान रहेगा ध्यान लगाना
मैं तो सोच रहा हूँ, गर न होता यह खूसट, जिंदगी से चिपका पाजामा
मैं तो बेकार ही उलझा रहता, तंग और बंद कपड़ों में रोज पड़ता सिर खपाना
तभी गली से गुजरते लाउडस्पीकर पर कंही से आवाज़ आयी
हमारी दूकान का “फाजामा” जरूर खरीदना, “दो सौ में तीन” जल्दी सरकार
कसी और तंग हाल जिंदगी में पाना है कुछ आराम
तो जनाब हमारे “फैंट कम पाजामा” से बढ़कर, सौदा नहीं है लाजवाब
पैंट, जीन्स और ट्रॉउज़र का साहब, लद गया अब अंदाज़ और जमाना
डोरबेल बजी दरवाजे पर खड़े मिले शर्माजी, पत्नी ने साधा निशाना
सुनो जी, मैं जो बाज़ार से लायी हूँ लेटेस्ट पाजामा, उसी में मिलनामिलाना
हद हो गयी, जब लॉन्ग ड्राइव पर मैं निकलने लगा, तो सब ने सुझाया
आराम से पहनो पाजामा और बिंदास होकर गाड़ी चलाना
खिड़की से अंदर किसने है झाँकना, सफर रहेगा सुहाना
न बॉस, न मीटिंग, न गर्लफ्रेंड, न ससुराल, अब किसको है रिझाना
सबसे मुँह है छुपाना, तो पहन ले मास्क और मस्त पाजामा
कल तक लोग छुपाते थे, शरमाते थे, कम ही पहनते थे पाजामा
बुरा व ख़राब मानते थे, जो दिख जाता कोई, पहने हुआ पाजामा
पर अब ठाठ और शाही तरीके से, चौबीसों घंटे पहना जाता है पाजामा
पतलून से पड़ा धोना हाथ, कमर पर कस गया इलास्टिक वाला पाजामा
जिंदगी की रेस में,जो कल तक थे जीरो वो आज बने है हीरो, जैसे अपना नाड़े वाला पाजामा
वक़्त की मेहरबानी हो तो, खोटा सिक्का भी चलता है जनाब, बिना बहाना